Revision summary
जलवायु अपक्षय व जल नियंत्रित करती है: गीली गर्मी में लेटराइट, शीत वन में पॉडजोल, शुष्कता में मरुस्थली मृदा। मृदा फिर वनस्पति चुनती है: मानसूनी फसलों के नीचे गंगा जलोढ़, कपास के नीचे दक्कन रेगुर, बांज-चीड़ के नीचे हिमालय पतली मृदा। वनस्पति गिरे पत्ते, जड़ें और वाष्पोत्सर्जन लौटाती है जो मृदा बचाते और स्थानीय जलवायु बदलते हैं। मानव सफाई और सिंचाई अपरदन व लवणता से लूप तोड़ सकती है।
Model answer
Introduction
जलवायु, मृदा और वनस्पति अलग बक्सों में नहीं बैठते। जलवायु शैल का अपक्षय करती है और जल बजट तय करती है; मृदा वह जल व पोषक संजोती है; वनस्पति फिर जड़, गिरे पत्ते और छाया से दोनों पर वापस प्रभाव डालती है।
Body
प्रथम नियंत्रण के रूप में जलवायु
- ताप और वर्षा रासायनिक अपक्षय, निक्षालन और वाष्पन की गति तय करते हैं, इसलिए अक्षांशीय व मानसूनी पेटियाँ विशिष्ट मृदाएँ बनाती हैं।
- गर्म आर्द्र जलवायु लेटराइट और लैटोसोल बनाती है जिनमें लोहा-अल्युमिनियम संवर्धन होता है, जैसा पश्चिमी घाट और ओडिशा के भागों में; वनस्पति वहाँ उष्णकटिबंधीय सदाबहार व अर्ध-सदाबहार वन की ओर जाती है।
- शीत जलवायु क्षय धीमा कर टैगा के नीचे पॉडजोल बनाती है; शुष्क जलवायु मरुद्भिदों के नीचे सिएरोजम और मरुस्थली मृदा बनाती है, जैसा थार में।
वनस्पति के माध्यम के रूप में मृदा
- गठन, पीएच, ह्यूमस और गहराई तय करते हैं कि कौन से पौधे जड़ें जमाएँ: गंगा मैदान की जलोढ़ दोमट ग्रीष्म मानसून और नहर सिंचाई से जल मिलने पर गहन कृषि सहती है।
- दक्कन ट्रैप की काली कपास मृदा (रेगुर) नमी रोकती है और अर्ध-शुष्क मानसूनी जलवायु में कपास व ज्वार के अनुकूल है।
- हिमालय में बांज व चीड़ के नीचे पर्वतीय मृदा पतली व अम्लीय है; अतिचारण या सड़क कटान छत्र हटते ही भूस्खलन के लिए खोल देते हैं।
वापसी प्रभाव के रूप में वनस्पति
- वन गिरे पत्ते मल्ल या मोर ह्यूमस बनाते हैं और ए-क्षितिज को वर्षा की चोट से बचाते हैं; चिपको अंतर्दृष्टि और बाद का संयुक्त वन प्रबंधन इसी भौतिक तथ्य पर टिके हैं।
- स्टेपी जैसी घास भूमियाँ घनी जड़ों से चेरनोजम बनाती हैं; यदि जलवायु सूखे या जोत निरंतर हो तो वही मृदा उड़ती है, जैसा ऐतिहासिक डस्ट बाउल और अति-कृषित शुष्क भूमि में।
- वन छत्र से वाष्पोत्सर्जन स्थानीय वायु को नम करता है; अमेजन और पश्चिमी घाट बहस वनस्पति को केवल जलवायु परिणाम नहीं, जलवायु कर्ता मानती हैं।
- मानव भूमि उपयोग — स्थानांतरी कृषि, हरित क्रांति सिंचाई और बागान एकफसली — लूप तोड़ सकता है, मृदा को लवणीय कर या मिश्रित वन को चाय व तेल ताड़ से बदल कर।
Flow diagram
flowchart TD C[जलवायु वर्षा ताप] --> S[मृदा प्रकार नमी] S --> V[वनस्पति बायोम] V --> C V --> S
Conclusion
जलवायु मृदा और बायोम गढ़ती है; मृदा पादप आवरण चुनती है; वनस्पति फिर मृदा की रक्षा करती है और सूक्ष्म जलवायु बदलती है। अंतर्संबंध एक लूप है, इसलिए निर्वनीकरण और बिना निकास सिंचाई जलवायु-मृदा-पादप पेटियाँ एक साथ बदलती हैं।
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क्या वनस्पति केवल जलवायु का अनुसरण करती है?
वह मुख्यतः जलवायु व मृदा का अनुसरण करती है, किंतु छत्र और जड़ें अंतःस्यंदन, एल्बिडो और स्थानीय नमी भी बदलती हैं, इसलिए वनस्पति कारण भी है, केवल परिणाम नहीं।
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पश्चिमी घाट में लेटराइट और सदाबहार वन साथ क्यों हैं?
भारी पर्वतीय वर्षा और गर्मी सिलिका निक्षालित कर लोहा-समृद्ध लेटराइट छोड़ती हैं, जबकि वही नमी ढलान न कटें तो सदाबहार वन सहती है।
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