Correct answer: (a) (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
व्याख्या
- A
(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है। विकल्प (a) सही ढंग से रेखांकित करता है कि प्रारंभिक राष्ट्रवादियों का यह मानना कि ब्रिटिश शासन आधुनिकीकरण लाने के लिए ईश्वरीय देन है और उनका “अन-ब्रिटिश राज” की नीतियों की आलोचना करना, दोनों ऐतिहासिक रूप से सत्य हैं, परंतु दूसरी बात पहली की सही व्याख्या नहीं है।
- B
(A) असत्य है, किन्तु (R) सत्य है है, किन्तु (R) सही है।
(A) गलत है, किन्तु (R) सही है। विकल्प (b) गलत तरीके से दावा करता है कि अभिकथन (A) असत्य है, जबकि शुरुआती राष्ट्रवादियों के विचार ऐतिहासिक साक्ष्यों द्वारा समर्थित हैं।
- C
(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है। विकल्प (c) यह गलत मानता है कि अन-ब्रिटिश शासन की शिकायत ही इस बात का कारण है कि ब्रिटिश शासन को ईश्वरीय देन क्यों माना गया।
- D
(A) सत्य है, किन्तु (R) असत्य है है, किन्तु (R) गलत है।
(A) सही है, किन्तु (R) गलत है। विकल्प (d) कारण (R) को असत्य बताता है, जो कि तथ्यात्मक रूप से गलत है क्योंकि शुरुआती नेताओं ने आर्थिक शोषण के खिलाफ आवाज उठाई थी।
Summary. आधिकारिक कुंजी (a) है क्योंकि प्रारंभिक राष्ट्रवादियों द्वारा ब्रिटिश शासन को आधुनिकीकरण की ईश्वरीय देन मानने वाला कथन (A) और “अन-ब्रिटिश राज” के खिलाफ शिकायत करने वाला कथन (R) दोनों सत्य हैं। शुरुआती नेता ब्रिटिश शासन के आधुनिक प्रभावों की उम्मीद करते थे और साथ ही उसकी आर्थिक नीतियों की आलोचना भी करते थे। हालांकि, कारण (R) इस बात का स्पष्टीकरण नहीं है कि अभिकथन (A) की स्थिति क्यों उत्पन्न हुई। परीक्षार्थी अक्सर ऐसे कथनों में कारण और प्रभाव का गलत संबंध मान लेते हैं, लेकिन यहाँ दोनों कथन स्वतंत्र रूप से सही हैं।