Correct answer: (b) (A) असत्य है, किन्तु (R) सत्य है है, किन्तु (R) सही है।
व्याख्या
- A
(A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
यह विकल्प दावा करता है कि अभिकथन और कारण दोनों सही हैं, लेकिन कारण, अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता है। हालाँकि, अभिकथन का आधार ही संविधान के तहत कानूनी रूप से गलत है।
- B
(A) असत्य है, किन्तु (R) सत्य है है, किन्तु (R) सही है।
यह विकल्प दावा करता है कि (A) गलत है, किन्तु (R) सही है। अभिकथन (A) गलत है क्योंकि 1956 के 7वें संविधान संशोधन अधिनियम ने स्पष्ट रूप से एक ही व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों के राज्यपाल के रूप में नियुक्त करने की अनुमति दी थी। इस बीच, कारण (R) पूरी तरह से सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 153 यह अनिवार्य करता है कि प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा, जिसे बाद में दोहरे प्रभार की अनुमति देने के लिए संशोधित किया गया था।
- C
(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
यह विकल्प दावा करता है कि दोनों कथन सही हैं और कारण, अभिकथन की व्याख्या करता है। यह गलत है क्योंकि अभिकथन स्वयं तथ्यात्मक रूप से गलत है।
- D
(A) सत्य है, किन्तु (R) असत्य है है, किन्तु (R) गलत है।
यह विकल्प दावा करता है कि अभिकथन सही है और कारण गलत है। यह गलत है क्योंकि अभिकथन असत्य है और कारण अनुच्छेद 153 के मूल पाठ को सही ढंग से उद्धृत करता है।
Summary. आधिकारिक कुंजी (b) है क्योंकि यह अभिकथन कि कोई व्यक्ति कई राज्यों के राज्यपाल के रूप में कार्य नहीं कर सकता है, गलत है, जबकि यह कारण कि अनुच्छेद 153 प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल का प्रावधान करता है, सत्य है। 7वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 ने एक ही व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों के राज्यपाल के रूप में नियुक्त करने की सुविधा के लिए अनुच्छेद 153 में संशोधन किया। इसलिए, कथन (A) गलत है, और कथन (R) सही है। भारतीय संघवाद में कार्यकारी प्रमुखों को समझने के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है। अतः केवल विकल्प (b) संवैधानिक स्थिति को सटीक रूप से दर्शाता है।