Q37 · UPPSC Prelims 2022 · Set B · General Studies

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‘संविधान की मूल संरचना’ की अवधारणा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किस वाद में प्रतिपादित की गई थी?

A केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य - 1973 में
B गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य - 1967 में
C चित्रालेखा बनाम मैसूर राज्य - 1964 में
D युसुफ बनाम बंबई राज्य - 1954 में

Correct answer: (a) केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य - 1973 में

व्याख्या

  1. A

    केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य - 1973 में

    केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य - 1973 में। इस ऐतिहासिक 1973 के निर्णय ने संविधान के बुनियादी ढाँचे के सिद्धांत को प्रतिपादित किया, जिसमें कहा गया कि संसद संविधान के मौलिक स्वरूप को नहीं बदल सकती है। चूँकि इस वाद ने इस सिद्धांत को औपचारिक रूप से प्रतिपादित किया था, इसलिए यह विकल्प सही उत्तर है।

  2. B

    गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य - 1967 में

    गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य - 1967 में। इस 1967 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में माना गया था कि संसद मौलिक अधिकारों को कम नहीं कर सकती, लेकिन इसने मूल संरचना के सिद्धांत को प्रतिपादित नहीं किया था। अतः यह विकल्प गलत है।

  3. C

    चित्रालेखा बनाम मैसूर राज्य - 1964 में

    चित्रालेखा बनाम मैसूर राज्य - 1964 में। यह 1964 का वाद मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के मानदंडों और पिछड़े वर्गों के दायरे से संबंधित था, जिसका संविधान की मूल संरचना से कोई संबंध नहीं है। इसलिए यह विकल्प गलत है।

  4. D

    युसुफ बनाम बंबई राज्य - 1954 में

    युसुफ बनाम बम्बर्इ राज्य - 1954 में। यह 1954 का वाद बम्बई मद्य निषेध अधिनियम और अनुच्छेद 15 के तहत लिंग भेदभाव के प्रावधानों से संबंधित था, न कि संविधान की मूल संरचना से। अतः यह विकल्प गलत है।

Summary. आधिकारिक कुंजी (a) केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य - 1973 में है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस ऐतिहासिक 1973 के निर्णय में संविधान की मूल संरचना की अवधारणा को प्रतिपादित किया था। जहाँ गोलकनाथ जैसे पहले के मामलों में संसद की संशोधन शक्ति पर विचार किया गया था, वहीं केशवानंद भारती के 13 न्यायाधीशों की पीठ ने संसद की संप्रभुता को सीमित किया। यह सिद्धांत सुनिश्चित करता है कि संशोधन के बावजूद मूल संवैधानिक मूल्य बरकरार रहें। इसलिए विकल्प (a) सही उत्तर है।