A
गोलकनाथ वाद 1967 में
B
केशवानन्द भारती वाद 1973 में
C
The Shankari Prasad Case in 1951
D
सज्जन सिंह बाद 1965 में
Correct answer: (b) केशवानन्द भारती वाद 1973 में
व्याख्या
- A
गोलकनाथ वाद 1967 में
गोलकनाथ (1967) ने कहा कि संसद मूल अधिकार संशोधित नहीं कर सकती। मूल ढाँचा सिद्धांत वहाँ नहीं आया।
- B
केशवानन्द भारती वाद 1973 में
केशवानन्द भारती (1973) ने कहा कि संसद की संशोधन शक्ति संविधान का मूल ढाँचा नष्ट नहीं कर सकती। यही आधिकारिक कुंजी है।
- C
The Shankari Prasad Case in 1951
शंकरी प्रसाद (1951) ने प्रथम संशोधन को सही ठहराया और संशोधन को अनुच्छेद 13 की ‘विधि’ नहीं माना।
- D
सज्जन सिंह बाद 1965 में
सज्जन सिंह (1965) ने संसद की व्यापक संशोधन शक्ति पर शंकरी प्रसाद का अनुसरण किया।
Summary. आधिकारिक कुंजी (b) है। गोलकनाथ ने अधिकार-संशोधन रोके; केशवानन्द ने मूल ढाँचा दिया। मिनर्वा मिल्स (1980) ने इसे दोहराया। संग्रहीत अक्षर (b) मान्य है।