Correct answer: (d) 3, 2, 4, 1
व्याख्या
- A
2, 3, 4, 1
(a) 2, 3, 4, 1. किताब-उल-हिंद से पहले पृथ्वीराज-रासो से शुरू होता है। अलबेरूनी की किताब-उल-हिंद ग्यारहवीं शताब्दी के आरंभ की है, रासो परंपरा से पहले।
- B
3, 1, 2, 4
(b) 3, 1, 2, 4. फतवा-ए-जहाँदारी को दूसरे स्थान पर रासो और तबकात से पहले रखता है। बरनी का फतवा चौदहवीं शताब्दी है, चार में अंतिम।
- C
4, 3, 1, 2
(c) 4, 3, 1, 2. तबकात-ए-नासिरी (तेरहवीं मध्य) से अलबेरूनी से पहले खुलता है—प्रथम होने के लिए बहुत देर।
- D
3, 2, 4, 1
(d) 3, 2, 4, 1. किताब-उल-हिंद (लगभग 1030) → पृथ्वीराज-रासो (1192-उत्तर परंपरा) → तबकात-ए-नासिरी (लगभग 1260) → फतवा-ए-जहाँदारी (बरनी, 14वीं शताब्दी)। आधिकारिक कुंजी।
Summary. आधिकारिक कुंजी (d) है। 3, 2, 4, 1। अलबेरूनी ने महमूद के साथ आने के बाद किताब-उल-हिंद लिखी। चंद बरदाई का रासो पृथ्वीराज तृतीय से जुड़ा है। मिनहाज-ए-सिराज ने दिल्ली सल्तनत के आरंभ में तबकात-ए-नासिरी पूरी की। जियाउद्दीन बरनी का फतवा-ए-जहाँदारी बाद का तुगलक-कालीन राजदर्पण है। केवल यही क्रम प्राचीनतम-से-नवीनतम है।