Q107 · UPPSC Prelims 2019 · Set A · General Studies

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संविधान की प्रस्तावना का विधिक स्वरूप क्या है?

A यह लागू किया जा सकता है
B यह लागू नहीं किया जा सकता है
C विशेष परिस्थितियों में लागू किया जा सकता है
D None of the above

Correct answer: (b) यह लागू नहीं किया जा सकता है

व्याख्या

  1. A

    यह लागू किया जा सकता है

    (a) यह लागू किया जा सकता है। न्यायालय प्रस्तावना को मूल अधिकार या अधिनियम की तरह रिट से नहीं चलाते।

  2. B

    यह लागू नहीं किया जा सकता है

    (b) यह लागू नहीं किया जा सकता। प्रस्तावना संविधान का भाग है (केशवानंद) और निर्वचन का सहायक है, पर स्वतंत्र वादयोग्य अधिकार नहीं बनाती। आधिकारिक कुंजी (b) है।

  3. C

    विशेष परिस्थितियों में लागू किया जा सकता है

    (c) विशेष परिस्थितियों में लागू। प्रस्तावना की कोई विशेष रिट नहीं; प्रवर्तन भाग 3, 4 और संशोधन शक्ति से ही चलता है।

  4. D

    None of the above

    (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं। विधिक स्वरूप तय है: सहायक, अकेले आदेश के रूप में न्याययोग्य नहीं—अतः (b) पहले से नाम है।

Summary. आधिकारिक कुंजी (b) है। प्रस्तावना न्यायालय में स्वतंत्र अधिकार की तरह प्रवर्तनीय नहीं। अर्थ की कुंजी है और केशवानंद के बाद संविधान का भाग, जिसके आदर्श मूल संरचना में जाते हैं।