Revision summary
दुधवा और पीलीभीत तराई गन्ने से सटे हैं, जो बड़े बिल्लियों का रात्रि आवरण है। राजमार्ग और बसाव गलियारे काटते हैं। नीलगाय और सुअर मैदान भर फसल संघर्ष बनाते हैं। उपाय केंद्र, बफर, मुआवजा और त्वरित प्रतिक्रिया हैं। बाघ योजना स्वयं नीलगाय क्षति नहीं रोकती।
Model answer
Introduction
उत्तर प्रदेश में संघर्ष अब केवल वन-केंद्र कथा नहीं। बाघ और तेंदुए तराई गन्ने का उपयोग करते हैं, और नीलगाय मैदान की फसल खाती है। कारण आवास दबाव और आसान आवरण हैं; उपायों को पशु और खेत दोनों बचाने चाहिए।
Body
कारण
- दुधवा और पीलीभीत के तराई वन गन्ने और धान से सटे हैं; ऊँचा गन्ना खंडों के बीच चलते तेंदुए और बाघ के लिए रात्रि आवरण है।
- खंडित गलियारे, राजमार्ग और नया बसाव वन खंडों के बीच पुरानी चाल काटते हैं।
- उद्यान के भीतर शिकार हमेशा पर्याप्त नहीं, या पशुधन किनारे बैठता है, इसलिए मार गाँव घटना बन जाती है।
- नीलगाय और जंगली सुअर कृषि मोज़ेक में फलते हैं जहाँ शिकार अवैध है और बाड़ कमजोर है, जो बिना बाघ शीर्षक के फसल संघर्ष है।
- नगरों के निकट अपशिष्ट डंप और आवारा पशु तेंदुओं को उप-नगरीय वार्डों में खींचते हैं।
उपाय
- दुधवा बाघ रिजर्व और पीलीभीत बाघ रिजर्व को अक्षुण्ण केंद्र, स्टाफ बफर और रखे गलियारे चाहिए, केवल पर्यटन द्वार नहीं।
- त्वरित प्रतिक्रिया दल, पशुधन व फसल मुआवजा, और पिंजरा-छोड़ प्रोटोकॉल प्रतिशोध हत्या घटाते हैं।
- तराई गाँवों में गन्ना-खेत प्रोटोकॉल, प्रकाश और सामुदायिक पहरे देर लाठीचार्ज से अधिक उपयोगी हैं।
- नीलगाय क्षति को बाड़, कानून के भीतर सामुदायिक अभियान और किनारों पर फसल चुनाव चाहिए, क्योंकि बाघ योजना नीलगाय खेत हल नहीं करती।
- दीर्घ भूमि-उपयोग को हर घास और बाढ़ मैदान खंड भरना बंद करना चाहिए जिसे वन्यजीव अभी प्रयोग करते हैं।
Flow diagram
flowchart TD H[आवास दबाव] --> C[संघर्ष] S[गन्ना आवरण] --> C N[नीलगाय फसल हमला] --> C C --> M[गलियारे मुआवजा प्रतिक्रिया] R[दुधवा पीलीभीत] --> M
Conclusion
संघर्ष बढ़ रहा है क्योंकि तराई खेत अब तेंदुआ आवरण हैं और मैदान खेत नीलगाय रसोई हैं, जबकि गलियारे सिकुड़ते हैं। उपाय रिजर्व, गलियारे, मुआवजा और खेत-किनारा डिजाइन हैं। मृत्यु के बाद केवल बल नीति नहीं।
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क्या संघर्ष केवल बाघ समस्या है?
नहीं। गन्ने में तेंदुआ और गेहूँ-दाल में नीलगाय दुधवा के बाघ समाचार जितने ही जीवित हैं।
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क्या स्थानांतरण हर तेंदुआ मामला हल करता है?
नहीं। किनारे पर आवरण, अपशिष्ट और पशुधन ठीक किए बिना पशु सरकाना संघर्ष अक्सर अगले गाँव में खिसकाता है।
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