Revision summary
उ.प्र. तराई-भाबर, गंगा-मैदान पश्चिम-अवध-पूर्वांचल, बुंदेलखंड और विंध्य-कैमूर में बँटता है। तराई गीला वन-खेत और नेपाल-किनारा अर्थ है। दोआब नहर गेहूँ, गन्ना और एनसीआर उद्योग है; अवध प्रशासन व चावल-गेहूँ; पूर्वांचल घना, बाढ़-प्रवण, भोजपुरी और श्रम-निर्यातक। बुंदेलखंड सूखा, दलहन और पत्थर है; सोनभद्र-मिर्जापुर बिजली व खान। संस्कृति पट्टियों का पीछा करती है: ब्रज, अवधी, भोजपुरी, बुंदेली।
Model answer
Introduction
उत्तर प्रदेश तराई हेम और दक्षिणी पथरीली किनारी वाला मैदानी राज्य है। उपयोगी विभाजन तराई-भाबर, पश्चिम-अवध-पूर्वांचल पट्टियों में गंगा मैदान, बुंदेलखंड, और विंध्य-कैमूर उच्चभूमि है। प्रत्येक पट्टी की ढाल व मिट्टी, फसल या खान, और सांस्कृतिक नाम पड़ोसी पट्टी के समान नहीं।
Body
तराई और भाबर
- भूगोल: नेपाल के साथ गीली, ऊँची जल-तालिका पट्टी; भाबर कंकरीली व छिद्रिल, तराई दलदली साल व ऊँची घास के साथ।
- अर्थ: गन्ना, धान, काष्ठ, और अब दुधवा-पीलीभीत के आसपास बाघ-पर्यटन; पलायन व सीमा-व्यापार किनारा भी।
- संस्कृति: थारू और संबंधित वन-खेत समुदाय, दक्षिण में अवधी-भोजपुरी आवरण; पट्टी उ.प्र. का पारिस्थितिक द्वार है, राजनीतिक केंद्र नहीं।
गंगा मैदान — पश्चिम, अवध, पूर्वांचल
- पश्चिमी दोआब (यमुना-गंगा): जलोढ़, नहर व नलकूप, गेहूँ-गन्ना-बागवानी, एनसीआर उद्योग व डेयरी; ब्रज और रुहेलखंड सांस्कृतिक कोर (मथुरा-आगरा; रामपुर-बरेली)।
- मध्य अवध (घाघरा-गंगा): लखनऊ-फैजाबाद/अयोध्या द्रोणी, उपजाऊ दोमट, चावल-गेहूँ, सेवा व प्रशासन; अवधी भाषा, नवाबी और रामायण नागरिक संस्कृति।
- पूर्वी पूर्वांचल: अधिक ग्रामीण घनत्व, बाढ़ व गाद, चावल, बुनाई और छोटे नगर (गोरखपुर, वाराणसी, आजमगढ़); भोजपुरी संस्कृति, तीर्थ (काशी, गोरखनाथ), और श्रम-निर्यात अर्थ।
- मैदान अन्न भंडार और मत हृदय है; क्षेत्रीय समानता विफल होती है जब उद्योग दोआब पर रुक जाए।
बुंदेलखंड
- भूगोल: बुंदेलखंड पठार, पुरानी चट्टानें, वृष्टि-छाया सूखा, तालाब और पथरीली मिट्टी।
- अर्थ: दलहन, तिलहन, पत्थर व ग्रेनाइट, अब झाँसी-चित्रकूट के आसपास रक्षा-गलियारा व एक्सप्रेसवे दांव; पलायन अभी आघात-शोषक है।
- संस्कृति: बुंदेली बोली, गढ़, और एक भिन्न सूखा स्मृति जो पूर्वी बाढ़ स्मृति नहीं।
विंध्य-कैमूर (मिर्जापुर-सोनभद्र)
- भूगोल: बलुआ पत्थर पठार, जलप्रपात, अवशिष्ट वन, और सोन किनारा।
- अर्थ: बिजली, खनन, सीमेंट और वन उपज; दोआब से भिन्न जनजातीय व ऊर्जा भूदृश्य भी।
- संस्कृति: मिश्रित बघेली-भोजपुरी पहाड़ी संस्कृति, शिल्प, और पुराने तीर्थ मार्ग (विंध्याचल)।
विभाजन क्यों मायने रखता है
- भूगोल जल समझाता है: तराई बाढ़, बुंदेलखंड सूखा, दोआब नहर।
- अर्थ नौकरियाँ समझाता है: एनसीआर उद्योग, अवध सेवा, पूर्वांचल श्रम, बुंदेलखंड पत्थर, सोनभद्र बिजली।
- संस्कृति समझाती है कि एक योजना नाम पाँच पट्टियों पर नहीं बैठता।
Flow diagram
flowchart TD UP[उत्तर प्रदेश] --> TB[तराई भाबर] UP --> WP[पश्चिमी दोआब] UP --> AW[अवध] UP --> PU[पूर्वांचल] UP --> BU[बुंदेलखंड] UP --> VK[विंध्य कैमूर] TB --> S[मिट्टी जल संस्कृति नौकरियाँ] WP[WP] --> S[S] AW[AW] --> S[S] PU[PU] --> S[S] BU[BU] --> S[S] VK[VK] --> S[S]
Conclusion
उ.प्र. को तराई-भाबर, पश्चिमी दोआब, अवध, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और विंध्य-कैमूर के रूप में बाँटें। भूगोल जल और चट्टान है। अर्थ अनाज, मिल, खान और पलायन है। संस्कृति ब्रज, अवधी, भोजपुरी, बुंदेली और पहाड़ी बोली है। नीति जो राज्य को एक मैदान माने, सूखा, बाढ़ और पूर्वी मजदूरी चूकेगी।
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क्या रुहेलखंड अलग भौतिक क्षेत्र है?
यह उत्तर-पश्चिम मैदान में मजबूत सांस्कृतिक-ऐतिहासिक क्षेत्र है। भौतिक रूप से वह गंगा मैदान में बैठता है, बुंदेलखंड जैसे पठार के रूप में नहीं।
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उ.प्र. को केवल पश्चिम, मध्य और पूर्व में क्यों न बाँटें?
वह तराई पारिस्थितिकी और दक्षिणी उच्चभूमि छुपाता है, जिनका जल, खनिज और संस्कृति भिन्न हैं।
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