Q8 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2025 · GS V (UP) · 8 अंक · कक्ष में ~125 शब्द · 2 min read

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सोशल मीडिया को परिभाषित कीजिए और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के संदर्भ में आंतरिक सुरक्षा के लिए इससे उत्पन्न कुछ खतरों की पहचान कीजिए।

विषय: UP society, festivals and languages. पाठ्यक्रम: Rural, Urban and Tribal issues — social structure, festivals, fairs, music, folk dances, literature and languages/dialects, social customs of UP. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2025 और UP society, festivals and languages से।

Revision summary

सोशल मीडिया उपयोगकर्ता सामग्री और नेटवर्क के इंटरनेट मंच हैं। यूपी में फॉरवर्ड अफवाह और डीपफेक साम्प्रदायिक दंगा बन सकते हैं। एन्क्रिप्टेड ऐप अतिवादी प्रचार और रसद के लिए प्रयुक्त हुए हैं। कुछ यूपी नगरों के साइबर धोखा और सिम फार्म व्यापक अपराध को वित्त देते हैं। पुलिस सेल और आईटी अधिनियम जवाब देते हैं, किंतु वैध वाणी खुली रहनी चाहिए।

Model answer

Introduction

सोशल मीडिया इंटरनेट मंचों का समूह है जिन पर उपयोगकर्ता वास्तविक समय में प्रकाशित, साझा और नेटवर्क करते हैं। परिभाषा पर्याप्त नहीं; उत्तर में उत्तर प्रदेश में दिखने वाले आंतरिक सुरक्षा खतरे आने चाहिए।

Body

परिभाषा

  • सोशल मीडिया में व्हाट्सऐप, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, एक्स, शेयरचैट जैसे ऐप और साइट शामिल हैं जहाँ सामग्री उपयोगकर्ता बनाता है और तेजी से आगे भेजता है।
  • सुरक्षा समस्या गति और गुमनामी है: अफवाह पुलिस बयान से पहले जिला पार कर सकती है।

खतरे, यूपी संदर्भ के साथ

  • साम्प्रदायिक अफवाह और डीपफेक वीडियो का उपयोग पश्चिमी और अन्य यूपी नगरों को भड़काने में हुआ है, जहाँ घनी बस्ती और मिश्रित मोहल्ले फॉरवर्ड क्लिप को कानून-व्यवस्था घटना बना देते हैं।
  • आतंक और अतिवादी मॉड्यूल ने प्रचार, भर्ती और रसद के लिए एन्क्रिप्टेड चैट प्रयुक्त की है, जिसमें नेपाल सीमा जिलों का मार्ग शामिल है।
  • संगठित साइबर धोखा, सिम फार्म और निवेश घोटाले यूपी नगरों से देशभर के बैंक खातों को निशाना बनाते हैं और अन्य अपराध को वित्त देते हैं।
  • गोहत्या अफवाह, परीक्षा लीक या विरोध आह्वान पर भीड़ राजमार्ग बंद कर थाने को दबा सकती है।
  • बाल यौन सामग्री, तस्करी विज्ञापन और अलग-थलग युवा का अतिवाद शांत खतरे हैं जो आंतरिक सुरक्षा को अभी भी घायल करते हैं।

राज्य प्रतिक्रिया

  • यूपी पुलिस सोशल मीडिया सेल, आईटी अधिनियम और यूएपीए सामान्य आईपीसी अपराधों के साथ बैठते हैं; स्थायी कार्य वैध वाणी को न दबाते हुए तेज तथ्य-जाँच है।

Flow diagram

flowchart TD
  SM[सोशल मीडिया] --> R[अफवाह डीपफेक]
  SM --> T[अतिवादी चैट]
  SM --> C[साइबर धोखा]
  R --> IS[यूपी आंतरिक सुरक्षा]
  T --> IS
  C --> IS

Conclusion

सोशल मीडिया उपयोगकर्ता-चालित इंटरनेट नेटवर्किंग है। उत्तर प्रदेश में इससे साम्प्रदायिक अफवाह, अतिवादी चैट, साइबर धोखा और फ्लैश भीड़ पैदा हुई है, इसलिए यह सार्वजनिक मंच के साथ आंतरिक सुरक्षा समस्या भी है।

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    Next question in the 2025 paper (Q9). View answer →

  • क्या सोशल मीडिया स्वयं अवैध है?

    नहीं। खतरा दुरुपयोग है: अफवाह, धोखा और अतिवादी संगठन, साधारण राजनीतिक वाणी नहीं।

  • यूपी विशेष रूप से क्यों खुला है?

    बहुत बड़ी जनसंख्या, उच्च व्हाट्सऐप उपयोग, मिश्रित नगर और लंबी खुली सीमा वायरल झूठ की गति बढ़ाती है।

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