Revision summary
भारत की अधिकांश वर्षा दक्षिण-पश्चिम मानसून में आती है, इसलिए समय झटका फसल को तेज मारता है। शुद्ध बोए क्षेत्र का लगभग आधा सिंचित है; दूसरा आधा वर्षा आधारित है। सिंचित भूमि को कुएँ और जलाशय भरने के लिए अभी वर्षा चाहिए। पीएमकेएसवाई और सूक्ष्म सिंचाई दुर्लभ जल खींचते हैं, मानसून की जगह नहीं लेते। वर्षा और सिंचाई पूरक बीमा हैं, दो प्रतिद्वंद्वी प्रणालियाँ नहीं।
Model answer
Introduction
भारतीय खेती अभी चार महीने के मानसून और सिंचाई पर जीती है, जो शुद्ध बोए क्षेत्र का केवल लगभग आधा ढकती है। इसलिए वर्षा और नहर या कुआँ विकल्प नहीं हैं। मौसम खिसके तो वे एक-दूसरे को पूरा करते हैं।
Body
मौसम संवेदनशीलता
- वार्षिक वर्षा का बड़ा भाग दक्षिण-पश्चिम मानसून में गिरता है, इसलिए देर आगमन, लंबा विराम या जल्दी वापसी उसी मौसम में बुवाई और उपज मारते हैं।
- भारत के शुद्ध बोए क्षेत्र का लगभग आधा सिंचित है; शेष वर्षा आधारित है और कमजोर मानसून का पहला झटका लेता है।
- सिंचित पट्टी भी भूजल पुनर्भरण और जलाशय भरने के लिए वर्षा पर निर्भर है, इसलिए सूखा वर्ष डीजल बिल बढ़ाता है और तालाब खाली करता है।
दोनों पूरक क्यों हैं
- सिंचाई बीमा है: सूखे अंतराल में फसल जीवित रखती है। वर्षा सस्ता थोक जल है जो प्रणाली भरता है।
- पीएमकेएसवाई के अधीन सूक्ष्म सिंचाई (प्रति बूँद अधिक फसल खिड़की सहित) दुर्लभ तालाब या नलकूप का मूल्य बढ़ाती है, वर्षा की जगह नहीं लेती।
- त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम और वाटरशेड परियोजनाएँ वर्षा संग्रह करने का प्रयास करती हैं ताकि सिंचाई केवल गहरा कुआँ न रहे।
- कृषि गणनाओं और आर्थिक सर्वेक्षणों के गोल आँकड़े लंबे समय से दिखाते हैं कि सिंचित उपज अधिक और स्थिर है, जबकि वर्षा क्षेत्र एल-नीनो और विराम-मानसून सप्ताहों से झूलते हैं।
आँकड़ों का पाठ सरल है: सिंचाई बढ़ाएँ और वर्षा का सम्मान रखें, क्योंकि अकेला स्रोत भारतीय कृषि नहीं ढोता।
Flow diagram
flowchart TD M[मानसून वर्षा] --> F[तालाब जलभर भरना] M --> R[वर्षा आधारित आधा क्षेत्र] F --> I[नहर कुआँ सूक्ष्म सिंचाई] I --> Y[स्थिर उपज] R --> V[मौसम झटका] V[V] --> I[I]
Conclusion
कृषि मौसम-संवेदनशील है क्योंकि शुद्ध बोए क्षेत्र का लगभग आधा अभी वर्षा आधारित है और मानसून गुच्छित है। सिंचाई वर्षा का पूरक बीमा और भंडार है; पीएमकेएसवाई और सूक्ष्म सिंचाई वह बीमा कम बर्बाद बनाते हैं।
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यदि सिंचाई बढ़े तो क्या मानसून मायने नहीं रखता?
नहीं। जलाशय और भूजल अभी वर्षा से भरते हैं। कमजोर मानसून सिंचाई लागत बढ़ाता है और भंडार खाली करता है।
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क्या सिंचित हिस्सा तीन-चौथाई है?
नहीं। ज्ञात राष्ट्रीय चित्र अभी शुद्ध बोए क्षेत्र का लगभग आधा सिंचाई के अधीन है, राज्यों में बड़ा अंतर सहित।
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