Q5 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2024 · GS III · 8 अंक · कक्ष में ~125 शब्द · 2 min read

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‘भारत जनसंख्या लाभांश के चरण से गुजर रहा है।’ इस संदर्भ में देश में बेरोजगारी की समस्या के उपयुक्त समाधान के लिए सरकार द्वारा अपनाए गए उपायों की चर्चा कीजिए।

विषय: Poverty, unemployment and inclusive growth. पाठ्यक्रम: Issues of Poverty, Unemployment, Social justice and inclusive growth. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2024 और Poverty, unemployment and inclusive growth से।

Revision summary

भारत का कार्यशील-आयु उभार तभी लाभांश है जब उसे उत्पादक काम मिले। खुली बेरोजगारी अल्परोजगारी और पतले अनौपचारिक काम को कम आँकती है। पीएमकेवीवाई, शिक्षुता और आईटीआई कौशल बेमेल पर निशाना हैं। मनरेगा, मुद्रा, पीएमईजीपी और पीएम विश्वकर्मा ग्रामीण और स्व-रोजगार अंतर ढकते हैं। पीएलआई और रोजगार मेले संगठित नौकरियाँ जोड़ने की कोशिश करते हैं; परीक्षा नियमित काम है, प्रशिक्षण गिनती नहीं।

Model answer

Introduction

जनसंख्या लाभांश तब होता है जब कार्यशील आयु हिस्सा ऊँचा हो और आश्रित कम हों। भारत उस खिड़की में है। यदि वह उभार बेरोजगार या पतले अनौपचारिक काम में बैठे तो लाभांश बोझ बन जाता है। इसलिए सरकारी उपायों को शरीरों को कुशल, भुगतान वाले काम में बदलना है।

Body

लाभांश और बेरोजगारी समस्या

  • बड़े युवा समूह को हर वर्ष पहली नौकरी चाहिए; मामूली खुली-बेरोजगारी दर भी विशाल निरपेक्ष संख्या और उससे बड़ी अल्परोजगारी छिपाती है।
  • बेमेल केवल रिक्ति बनाम डिग्री नहीं है: कई नौकरियाँ अनौपचारिक हैं, और कई स्नातकों में वह कौशल नहीं जो नियोक्ता चाहता है।
  • यदि लाभांश वर्ष कारखाना, देखभाल और सेवा अवशोषण के बिना निकल जाएँ, भारत अमीर होने से पहले बूढ़ा होगा।

अपनाए गए उपाय

  • मनरेगा ग्रामीण माँग की पटरी है; वह करियर नहीं बनाता, किंतु खेत काम पतला हो तो संकट रोकता है।
  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन और आईटीआई उन्नयन उस कौशल अंतर को बंद करने की कोशिश करते हैं जो युवा उभार बर्बाद करता है।
  • पीएमईजीपी, स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, मुद्रा और पीएम विश्वकर्मा वहाँ स्व-रोजगार धकेलते हैं जहाँ मजदूरी नौकरियाँ कम हैं।
  • पीएलआई, मेक इन इंडिया और रोजगार मेले संगठित विनिर्माण और सार्वजनिक भर्ती झोंकों का लक्ष्य रखते हैं; एनआरएलएम और डे-नुलम गरीब महिलाओं को आजीविका समूहों में बाँधते हैं।

उपाय अनेक हैं। परीक्षा यह है कि नियमित, कुशल काम श्रम बल से तेज बढ़े, न कि नया संक्षिप्त नाम आए।

Flow diagram

flowchart TD
  D[जनसंख्या लाभांश] --> Y[युवा नौकरी जरूरत]
  Y --> U[बेरोजगारी अल्परोजगारी]
  SK[पीएमकेवीवाई शिक्षुता] --> J[कुशल काम]
  MG[मनरेगा मुद्रा पीएमईजीपी] --> J
  PLI[पीएलआई रोजगार मेला] --> J
  J[J] --> D[D]

Conclusion

भारत का लाभांश तभी वास्तविक है जब कार्यशील-आयु उभार बढ़ती उत्पादकता पर नियोजित हो। कौशल, मनरेगा, उद्यम ऋण और पीएलआई राज्य के उपकरण हैं। वे तब काम करते हैं जब अल्परोजगारी कटती है, केवल प्रशिक्षण गिनती से नहीं।

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  • क्या लाभांश के लिए मनरेगा काफी है?

    वह ग्रामीण सुरक्षा जाल है। लाभांश को कौशल और संगठित नौकरियाँ भी चाहिए।

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