Revision summary
रुग्ण इकाई ऋण नहीं चुका सकती और चालू संस्था नहीं रहती; एनपीए और अवैतनिक मजदूरी पीछे आते हैं। कारण: माँग गिरावट, पतली पूँजी, कमजोर प्रबंधन, बिजली-रसद और धीमा निकास। जानबूझकर चूक है, पर प्रत्येक विफलता धोखा नहीं। आईबीसी 2016 सिका/बीआईएफआर विलंब के बाद समयबद्ध पुनर्जीवित-या-परिसमापन पथ है। एमएसएमई भुगतान अनुशासन, तकनीक उन्नयन और श्रमिक सुरक्षा स्थायी नर्सिंग से बेहतर हैं।
Model answer
Introduction
औद्योगिक इकाई तब ‘रुग्ण’ होती है जब ऋण चुकाने और चालू संस्था बने रहने जितना अधिशेष न पैदा कर सके—हानि निवल मूल्य खा जाती है, बैंक खाते को अनर्जक आस्ति वर्गीकृत करते हैं, और श्रमिक अवैतनिक मजदूरी देखते हैं। भारत ने यह कपड़ा, इंजीनियरिंग, चीनी और कई एमएसएमई में देखा, केवल कुछ बड़े सार्वजनिक संयंत्रों में नहीं।
Body
कारण
- माँग और प्रतिस्पर्धा: पुराना उत्पाद मिश्रण, उदारीकरण के बाद आयात उछाल और सस्ते विकल्प क्षमता को बेकार छोड़ते हैं।
- वित्त: अल्प पूँजीकरण, कार्यशील पूँजी का मोड़, सरकारी खरीदारों से विलंबित भुगतान और महँगा ऋण नकदी अंतर को दिवालियापन बना देते हैं।
- प्रबंधन: पारिवारिक विवाद, कमजोर लागत नियंत्रण और पेशेवर न बनने की अनिच्छा फर्मों को बहुत देर तक पुनर्गठन से रोकते हैं।
- इनपुट और अवसंरचना: अनियमित बिजली, रसद लागत और कच्चे माल की कीमत-चोट सतत-प्रक्रिया संयंत्रों को मारती है।
- श्रम और विनियमन: बिना व्यवहार्य वीआरएस के अधिक कर्मचारी रखना, विलंबित बंद अनुमति (आईबीसी से पहले) और निरीक्षक विलंब ने निकास लागत बढ़ाई, पूँजी मृत इकाइयों में फँसी रही।
- बाहरी झटके: मानसून-जुड़ी ग्रामीण माँग, वैश्विक वस्तु चक्र और नीति उलटाव पतली मार्जिन इकाई को किनारे धकेल सकते हैं।
- जानबूझकर चूक और धोखा हैं, पर प्रत्येक रुग्ण इकाई को आपराधिक मानना वास्तविक व्यापार विफलता छिपाता है।
सुझाव
- पूर्व चेतावनी: बैंक और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय नकदी प्रवाह और जीएसटी आँकड़े से निवल मूल्य पूरी तरह घिसने से पहले समाधान बाध्य करें।
- दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (2016) समयबद्ध पथ: यदि उद्यम मूल्य धनात्मक हो तो पुनर्जीवित करें, अन्यथा परिसमापन कर भूमि, लाइसेंस और श्रम मुक्त करें।
- केवल वहीं पुनर्पूँजीकरण जहाँ पेशेवर टर्नअराउंड योजना हो; मृत उत्पाद पंक्ति को राजनीतिक संयंत्र की तरह पुनर्वित्त न करें।
- एमएसएमई विलंबित-भुगतान अनुशासन (समाधान), फैक्टरिंग और समय पर जीएसटी रिफंड कार्यशील पूँजी बचाते हैं।
- प्रौद्योगिकी उन्नयन (सीएलसीएसएस-प्रकार), क्लस्टर साझा सुविधा केंद्र और बिजली विश्वसनीयता लागत ढेर काटते हैं।
- श्रम: बंद इकाइयों के श्रमिकों के लिए कौशल और सामाजिक सुरक्षा, संपूर्ण निकास पर प्रतिबंध नहीं, जो केवल ज़ॉम्बी फर्में बढ़ाता है।
- सिका/बीआईएफआर युग के विलंब ने सिखाया कि बिना कठोर समयसीमा की अनंत नर्सिंग स्वयं रुग्णता का कारण है।
Flow diagram
flowchart TD C[माँग वित्त प्रबंधन अवसंरचना निकास विलंब] --> S[औद्योगिक रुग्णता] S --> I[आईबीसी पूर्व चेतावनी] S --> M[एमएसएमई भुगतान तकनीक बिजली] S --> L[श्रमिक सामाजिक सुरक्षा जॉम्बी फर्म नहीं] I --> R[पुनर्जीवित या परिसमापन] M[M] --> R[R] L[L] --> R[R]
Conclusion
भारत में औद्योगिक रुग्णता बाजार, वित्त, प्रबंधन, अवसंरचना और विलंबित निकास का मिश्रण है। इलाज पूर्व पहचान, आईबीसी-शैली समयबद्ध पुनर्जीवन या बंद, एमएसएमई के लिए ईमानदार कार्यशील-पूँजी रेल और प्रौद्योगिकी व बिजली उन्नयन है—उस इकाई को स्थायी सब्सिडी नहीं जिसका उत्पाद अब नहीं।
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Next question in the 2019 paper (Q8). View answer →
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क्या रोजगार बचाने को प्रत्येक रुग्ण कारखाना खुला रखना चाहिए?
यदि उद्यम मूल्य गया, विलंब केवल अवैतनिक मजदूरी बढ़ाता है। तेज समाधान फिर श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और नए काम पर रखें।
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क्या केवल उदारीकरण ने औद्योगिक रुग्णता पैदा की?
आयात प्रतिस्पर्धा ने कमजोर इकाइयाँ उजागर कीं, पर अल्प पूँजी, प्रबंधन और निकास विलंब पुराने कारण थे।
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