Revision summary
एलडब्ल्यूई भर्ती पतली राज्य उपस्थिति, वन-भूमि संघर्ष और बेरोजगार युवा पर चलती है। सुरक्षा नागरिकों की रक्षा करे और वास्तविक समर्पण-पुनर्वास दे, केवल छापे नहीं। वन अधिकार अधिनियम, पेसा और साफ भूमि अभिलेख भूमि-हड़प शिकायत काटते हैं। सड़क, वनोपज बाजार, रोशनी कौशल और भरे स्कूल लेवी से प्रतिस्पर्धा करते हैं। मुख्यधारा वापसी जीता हुआ संविधान है, प्रेस विज्ञप्ति नहीं।
Model answer
Introduction
वामपंथी उग्रवाद वहाँ फलता है जहाँ राज्य पतला है, भूमि और वन अधिकार विवादित हैं, और युवाओं को वैध आजीविका नहीं दिखती। प्रभावित नागरिकों को वापस जीतना इसलिए शासन और गरिमा का सुधार है, केवल कैडर की गिनती नहीं।
Body
सुरक्षा जो नागरिकों की रक्षा करे
- सशस्त्र दस्तों के विरुद्ध लक्षित अभियान संरक्षित शिविर, सड़क खोलने और मोबाइल कनेक्टिविटी के साथ बैठें ताकि गाँव दो बार दंडित न हो—एक बार कैडर से और एक बार जवाबदेहहीन छापे से।
- समर्पण-सह-पुनर्वास, कौशल, वजीफा और साक्षी संरक्षण के साथ, लड़ाकू को नागरिक बनाता है; फर्जी मुठभेड़ वह पथ नष्ट करती है।
अधिकार, भूमि और वन
- वन अधिकार अधिनियम, पेसा और भूमि अभिलेखों का तेज, ईमानदार क्रियान्वयन वह शिकायत काटता है जिसे भर्तीकर्ता “भूमि हड़पने वाला राज्य” कहकर सुनाते हैं।
- सीएपीएफ के नागरिक कार्रवाई कार्यक्रम, स्कूल, आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य शिविर नियमित हों, एक दिवसीय झंडा प्रदर्शन नहीं।
आजीविका और कनेक्टिविटी
- सड़कें, बैंकिंग संवाददाता, लघु वनोपज का एमएसपी और कौशल योजनाएँ (एलडब्ल्यूई जिलों में रोशनी सहित) वैध आय देती हैं जो लेवी से प्रतिस्पर्धा करे।
- विशेष केंद्रीय सहायता, आईएपी/आकांक्षी जिला और शिक्षक-चिकित्सक रिक्ति भरना जिले को विकास रंगमंच मानता है, केवल पुलिस मानचित्र नहीं।
राजनीतिक और कथा सुधार
- स्थानीय चुनाव, ग्राम सभाएँ और विश्वसनीय शिकायत निवारण राजनीति को जनताना सरकार दावे से खींचते हैं।
- समाधान-प्रकार सिद्धांत (स्मार्ट नेतृत्व, आसूचना और लोक धारणा) विफल होता है यदि धारणा केवल प्रेस विज्ञप्ति हो।
Flow diagram
flowchart TD LWE[एलडब्ल्यूई प्रभावित नागरिक] --> S[सुरक्षित गाँव सड़क] LWE --> R[वन अधिकार पेसा भूमि] LWE --> J[रोजगार वनोपज कौशल] LWE --> G[ग्राम सभा शिकायत] S --> M[सामाजिक आर्थिक मुख्यधारा] R --> M J --> M G --> M
Conclusion
सुधारात्मक रणनीति दोहरी पटरी है: बंदूक अलग करो, और गाँव को अधिकार, सड़क, स्कूल और वैध मजदूरी से भर दो। नागरिक मुख्यधारा में तब लौटते हैं जब भारतीय संविधान समानांतर व्यवस्था से सस्ता और सुरक्षित जीवन देता है। वन अधिकार, रोजगार और जवाबदेह पुलिसिंग बिना बल विद्रोह को पुनश्चक्रित करता है।
Quick related
Students also ask
-
Elaborate on the ‘National Defence Council’ of India.
Next question in the 2018 paper (Q9). View answer →
-
क्या विकास बंदूक शांत होने तक प्रतीक्षा कर सकता है?
सड़क और स्कूल जो कभी नहीं खुलते बंदूक जीवित रखते हैं। सुरक्षा और सेवाएँ साथ चलें।
-
क्या समर्पण नागरिकों को वापस जीतने के लिए पर्याप्त है?
समर्पण कैडर की मदद करता है। गाँव वाले तब लौटते हैं जब अधिकार, मजदूरी और पुलिसिंग उन पर भी निष्पक्ष हो जिन्होंने कभी बंदूक नहीं पकड़ी।
PYQ trend
When UPSC asked this
Related PYQs from other years, newest first. Open a question to read it.
-
2020 · Q18 · UPGS3 · 12 marks
Describe in detail the issues of nuclear proliferation and the existing control mechanism. -
2020 · Q20 · UPGS3 · 12 marks
At present, in emerging security challenges, how can nuclear weapons be advantageous in India's security management? Explain. -
2019 · Q7 · UPGS3 · 8 marks
What are the causes of industrial sickness in India? Give suitable suggestions to overcome the problem. -
2019 · Q12 · UPGS3 · 12 marks
“Nuclear deterrence is the only effective alternative to counter the deadly genocidal nuclear weapons.” Analytically explain this statement. -
2019 · Q17 · UPGS3 · 12 marks
Explain the challenges of food security in India. How can they be removed? Explain. -
2018 · Q14 · UPGS3 · 12 marks
“Micro, Small and Medium Enterprises (MSMEs) are the drivers of economic growth and employment proliferation in India.” Examine this statement. -
2018 · Q18 · UPGS3 · 12 marks
Discuss the challenges of National Security in the age of Globalization. -
2018 · Q20 · UPGS3 · 12 marks
Write a note on the challenges and their solutions for Law and Order in Uttar Pradesh at the present time.
More from this paper
Q1 · UPSC Mains 2018 · UPGS3 · 8 marks
वैश्वीकरण के कारण भारत में औद्योगिक विकास पर पड़ने वाले प्रभावों का मूल्यांकन कीजिए।
Economic planning and NITI Aayog
1991 सुधार और डब्ल्यूटीओ ने भारतीय उद्योग को व्यापार, पूँजी और प्रौद्योगिकी के लिए खोला। ऑटो, फार्मा, दूरसंचार और संगठित इंजीनियरिंग को एफडीआई, गुणवत्ता और निर्यात मिला। श्रम-प्रधान एमएसएमई को सस्ता आयात और अनौपचारिक श्रम झेलना पड़ा। कारखाना वृद्धि कुछ पेटियों में सिमटी; विनिर्माण का जीडीपी हिस्सा मामूली रहा। प्रभाव मिश्रित क्षमता है, समान औद्योगिकीकरण नहीं।
Q2 · UPSC Mains 2018 · UPGS3 · 8 marks
नीति आयोग द्वारा तैयार की गई राष्ट्रीय ऊर्जा नीति 2017 के परिप्रेक्ष्य में, नवीनीकरणीय ऊर्जा स्रोतों द्वारा ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्यों का वर्णन कीजिए।
Economic planning and NITI Aayog
नीति आयोग का 2017 मसौदा एनईपी मौजूदा आरई और जलवायु प्रतिज्ञाओं को एक ऊर्जा फ्रेम में समेटता है। 2022 तक 175 गीगावाट: 100 सौर, 60 पवन, 10 जैव-शक्ति, 5 लघु जलविद्युत। 2030 तक लगभग 40 प्रतिशत गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता पेरिस-जुड़ा लक्ष्य है। सभी के लिए 24×7 बिजली और ग्राम विद्युतीकरण पहुँच के साथी हैं। कॉरिडोर, बोली और मस्ट-रन क्षमता लक्ष्यों को उत्पादन बनाते हैं।
Q3 · UPSC Mains 2018 · UPGS3 · 8 marks
‘भारत में सतत विकास लक्ष्यों के प्रयास’ पर प्रकाश डालिए।
Economic planning and NITI Aayog
एसडीजी सत्रह 2030 संयुक्त राष्ट्र लक्ष्य हैं; भारत उन्हें मौजूदा केंद्र-राज्य योजनाओं पर मैप करता है। नीति आयोग समन्वय करता है और एसडीजी इंडिया इंडेक्स प्रकाशित करता है; मोस्पी संकेतक बनाता है। गरीबी, स्वास्थ्य, शिक्षा, जल, ऊर्जा और जलवायु लक्ष्य नामित फ्लैगशिप पर सवार हैं। पोषण, अधिगम और वायु पर बड़े अंतर-राज्य अंतराल रह जाते हैं। प्रयास संघीय वितरण है, अलग संयुक्त राष्ट्र मंत्रालय नहीं।
Toppers' copies
Toppers' copies for this question will be uploaded soon.