Revision summary
औपनिवेशिक परिषद अधिनियम तथा 1919 और 1935 अधिनियमों ने भारतीय विधायकों को प्रशिक्षित किया। कैबिनेट मिशन और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 ने सभा को विधिक बैठक दी। सभा के भीतर वेस्टमिंस्टर प्रक्रिया संसदीय शिल्प की निरंतरता दिखाती है। लोक संप्रभुता, अधिकार और ब्रिटिश विधायी शक्ति का अंत विच्छेद दिखाते हैं। कथन आधा सत्य है: कानूनी उद्भव औपनिवेशिक विकास में, राजनीतिक उद्भव राष्ट्रीय आंदोलन में।
Model answer
Introduction
संविधान सभा इसलिए बैठी कि ब्रिटिश क़ानूनों और कैबिनेट मिशन ने कानूनी द्वार खोला। आलोचनात्मक परीक्षण को यह भी दिखाना चाहिए कि सभा का प्राधिकार राष्ट्रीय आंदोलन और जनता से आया, केवल औपनिवेशिक संसद से नहीं।
Body
औपनिवेशिक संसदीय श्रृंखला
- भारतीय परिषद अधिनियम और 1919 तथा 1935 के भारत शासन अधिनियमों ने भारतीय सदस्यों को विधायी प्रक्रिया, बजट और प्रांतीय मंत्रिमंडलों में प्रशिक्षित किया।
- 1935 अधिनियम ने संघ और संघीय न्यायालय का खाका भी खींचा, इसलिए संविधान-निर्माण खाली कानूनी पृष्ठ पर नहीं शुरू हुआ।
- 1946 की कैबिनेट मिशन योजना ने प्रांतीय विधायिकाओं से सभा चुनने की तत्काल कानूनी विधि दी।
- भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 ने तब सभा को डोमिनियन विधायिका बनाया और ब्रिटिश संसद की भारत के लिए विधायन शक्ति हटाई।
कथन आंशिक सत्य क्यों है
- उन अधिनियमों और मिशन के बिना 1946 में प्रांतीय विधायकों का मान्यता प्राप्त निर्वाचक मंडल नहीं होता।
- नेहरू, प्रसाद, अंबेडकर और अन्य ने वेस्टमिंस्टर रूप—तीन वाचन, समितियाँ, अध्यक्ष की कुर्सी—इसीलिए प्रयोग किए कि औपनिवेशिक विधायिकाओं में अभ्यास किया था।
- उस संकीर्ण अर्थ में सभा राज के अधीन संसदीय विकास का विधिक परिणाम थी।
आलोचनात्मक विच्छेद
- सभा ब्रिटिश संसद की उस तरह की रचना नहीं थी जैसी 1935 की संघीय विधायिका होती; 15 अगस्त 1947 के बाद उसका प्राधिकार स्वतंत्रता अधिनियम और भारतीय राजनीतिक इच्छा से आया।
- वयस्क मताधिकार, नए संविधान में पृथक निर्वाचक मंडलों का अंत, मौलिक अधिकार और बाद का मूल-संरचना सिद्धांत औपनिवेशिक संसदीय तर्क की भेंट नहीं थे।
- भारत का बड़ा भाग रियासती था, प्रांतीय नहीं, इसलिए सभा को विलय राजनीति भी सोखनी पड़ी जिसे 1935 की कोई अनुसूची पूरा नहीं कर चुकी थी।
- उद्देश्य प्रस्ताव और प्रस्तावना लोक संप्रभुता का दावा करते हैं; वह दावा औपनिवेशिक वैधता से विच्छेद है, उसका अंतिम खंड नहीं।
संतुलन
- न्यायपूर्ण परीक्षण 1909 से 1947 तक वैधानिक सीढ़ी स्वीकार करता है और फिर भी इनकार करता है कि संविधान केवल औपनिवेशिक संसदीय अवशेष है।
Flow diagram
flowchart TD C[1909 से 1935 अधिनियम] --> M[कैबिनेट मिशन 1946] M --> A[संविधान सभा] I[स्वतंत्रता अधिनियम 1947] --> A N[राष्ट्रीय आंदोलन] --> A A --> K[संविधान 1950]
Conclusion
संविधान सभा औपनिवेशिक संसदीय तंत्र और 1947 अधिनियम से विधिक रूप से बुलाई गई। राजनीतिक रूप से वह संप्रभु भारतीय निकाय थी, इसलिए कथन आरंभिक सीढ़ी के रूप में सत्य है और संविधान के स्रोत के पूर्ण वर्णन के रूप में असत्य है।
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क्या सभा वयस्क मताधिकार से चुनी गई?
नहीं। सदस्य सीमित मताधिकार पर चुनी प्रांतीय विधायिकाओं द्वारा चुने गए। संविधान ने तब भविष्य की लोक सभाओं के लिए वयस्क मताधिकार दिया।
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क्या ब्रिटिश संसद ने भारतीय संविधान अधिनियमित किया?
नहीं। उसने स्वतंत्रता अधिनियम बनाया। संविधान संविधान सभा ने अंगीकृत किया।
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