Revision summary
भारत की वृद्धि अभी आयातित तेल-गैस पर निर्भर है, जिसका बड़ा भाग पश्चिम एशिया से है। सऊदी अरब, इराक, यूएई कच्चा तेल और कतर एलएनजी मूल आपूर्तिकर्ता हैं। नीति उपकरण दीर्घ अनुबंध, सामरिक पेट्रोलियम भंडार और खाड़ी ऊर्जा परिसंपत्तियों में भारतीय हिस्से हैं। आई2यू2 और यूएई सीईपीए सहयोग को निवेश और स्वच्छ ऊर्जा तक चौड़ा करते हैं। ईरान पटरियाँ और गैर-खाड़ी स्रोत हेज हैं; ओपेक राजनीति और होरमुज जोखिम जोखिम बने रहते हैं।
Model answer
Introduction
भारत के कारखाने, खेत और नगर अभी आयातित हाइड्रोकार्बन पर चलते हैं, जिसका बड़ा भाग पश्चिम एशिया से आता है। ऊर्जा सुरक्षा इसलिए विदेश नीति फाइल है, केवल पेट्रोलियम मंत्रालय फाइल नहीं, और पश्चिम एशिया उस फाइल की पहली भूगोल है।
Body
पश्चिम एशिया केंद्र में क्यों है
- सऊदी अरब, इराक और यूएई का कच्चा तेल तथा कतर का एलएनजी घरेलू उत्पादन और बढ़ती अर्थव्यवस्था के बीच की खाई लंबे समय से भरते रहे हैं।
- कीमत उछाल और होरमुज जलडमरूमध्य जोखिम सीधे चालू खाते, मुद्रास्फीति और राजकोषीय सब्सिडी बिल में जाते हैं, इसलिए जब तक भारत विविधता न करे वृद्धि खाड़ी आपूर्ति की बंधक रहती है।
नीति सहयोग
- दीर्घ कच्चा तेल और एलएनजी अनुबंध, सामरिक पेट्रोलियम भंडार, तथा खाड़ी क्षेत्रों और रिफाइनरियों में भारतीय डाउनस्ट्रीम हिस्से स्पॉट कार्गो से आगे आपूर्ति बाँधते हैं।
- आई2यू2 (भारत, इजरायल, यूएई, संयुक्त राज्य), यूएई सीईपीए और सऊदी निवेश वार्ता ऊर्जा को केवल टैंकर नहीं, खाद्य पार्क, सौर और ग्रिड निवेश से जोड़ते हैं।
- ईरान के पुराने मार्ग (चाबहार, पहले एलएनजी और पाइपलाइन विचार) अमेरिका, रूस और अफ्रीका की नई हेजिंग के साथ बैठते हैं, क्योंकि एक खाड़ी मार्ग पर अति-निर्भरता स्वयं असुरक्षा है।
सीमाएँ
- पश्चिम एशियाई राजनीति, ओपेक+ कटौती और ईरान पर प्रतिबंध सर्वश्रेष्ठ अनुबंध भी तोड़ सकते हैं; सहयोग आवश्यक है, घरेलू दक्षता और नवीकरणीय के बिना पर्याप्त नहीं।
Flow diagram
flowchart TD G[पश्चिम एशिया तेल और एलएनजी] --> I[भारत ऊर्जा सुरक्षा] I --> C[अनुबंध एसपीआर निवेश] C --> E[उद्योग और वृद्धि] D[विविधता ईरान अमेरिका अफ्रीका नवीकरणीय] --> I
Conclusion
पश्चिम एशिया से भारत का ऊर्जा सहयोग हाइड्रोकार्बन सुरक्षा की रीढ़ है: सऊदी अरब, यूएई, इराक, कतर और जहाँ संभव हो ईरान के साथ अनुबंध, भंडार और निवेश। आर्थिक प्रगति को वह रीढ़ और विविधता दोनों चाहिए, नहीं तो खाड़ी झटका वृद्धि झटका बन जाता है।
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क्या रूसी रियायती कच्चे के बाद भारत ने पश्चिम एशियाई तेल खरीद बंद कर दी?
नहीं। 2022 के बाद रूस ने बड़ा हिस्सा जोड़ा, पर पश्चिम एशिया संरचनात्मक आपूर्तिकर्ता और कीमत-जोखिम भूगोल रहता है।
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क्या चाबहार केवल ऊर्जा परियोजना है?
नहीं। यह मुख्यतः अफगानिस्तान और मध्य एशिया हेतु कनेक्टिविटी दांव है। ईरान से ऊर्जा सहयोग प्रतिबंधों से बाधित रहा है।
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