Q4 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2021 · GS II · 8 अंक · कक्ष में ~125 शब्द · 1 min read

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संविधान की उद्देशिका संविधान के आधारभूत लक्षण एवं मानव गरिमा की वृद्धि का आश्वासन देती है। स्पष्ट कीजिए।

विषय: Indian Constitution. पाठ्यक्रम: Indian Constitution — historical underpinnings, evolution, features, amendments, significant provisions and basic structure. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2021 और Indian Constitution से।

Revision summary

उद्देशिका संप्रभुता, समाजवाद, पंथनिरपेक्षता, लोकतंत्र और गणराज्य को व्यवस्था की पहचान देती है। न्याय, स्वतंत्रता और समता वे लक्ष्य हैं जिन्हें आधारभूत ढाँचा सिद्धांत सुरक्षित करता है। केशवानंद ने उद्देशिका को असंशोधनीय सार का मार्गदर्शक माना। बंधुता व्यक्ति की गरिमा स्पष्ट आश्वस्त करती है। गरिमा तब समता, स्वतंत्रताओं और अनुच्छेद 21 को सूचित करती है।

Model answer

Introduction

उद्देशिका संविधान के दर्शन की कुंजी है। स्पष्टीकरण में दिखना चाहिए कि उसके शब्द आधारभूत ढाँचा नामित करते हैं और गणराज्य को व्यक्ति की गरिमा से बाँधते हैं।

Body

आधारभूत लक्षणों का आश्वासन

  • संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य—न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के साथ—वह पहचान देते हैं जिसे बाद के वाद आधारभूत ढाँचे का भाग मानते हैं।
  • केशवानंद भारती (1973) ने उद्देशिका को इस बात का मार्गदर्शक माना कि संशोधन करते हुए संसद क्या नष्ट नहीं कर सकती।
  • सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक न्याय तथा प्रतिष्ठा और अवसर की समता पाठ के कल्याण और गैर-भेदभाव केंद्र को बाँधते हैं।
  • 42वें संशोधन ने समाजवादी और पंथनिरपेक्ष जोड़े, जिन्हें न्यायालय मूल योजना में पहले से निहित पढ़ता है।

मानव गरिमा की वृद्धि

  • विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता भीतरी व्यक्ति की रक्षा करती है, केवल मतदाता की नहीं।
  • व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता आश्वस्त करती बंधुता स्पष्ट गरिमा खंड है।
  • वही पंक्ति अनुच्छेद 14, 19, 21 और इस विचार को पोसती है कि विकास लोगों को साधन न माने।

साथ पढ़ना

  • आधारभूत लक्षण ढाँचा हैं; गरिमा वह प्रयोजन है जिसकी वे प्रत्येक व्यक्ति के लिए सेवा करते हैं।

Flow diagram

flowchart TD
  P[उद्देशिका] --> B[संप्रभु समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्र गणराज्य]
  P --> J[न्याय स्वतंत्रता समता]
  P --> D[बंधुता और गरिमा]
  B --> S[आधारभूत लक्षण]
  J --> S
  D --> H[मानव गरिमा]

Conclusion

उद्देशिका राजनीतिक विशेषणों और न्याय–स्वतंत्रता–समता त्रयी से गणराज्य के आधारभूत लक्षण आश्वस्त करती है, तथा स्वतंत्रता और बंधुता खंड से मानव गरिमा बढ़ाती है। न्यायालय इसे मार्गदर्शक मानते हैं, अनुच्छेदों का विकल्प नहीं।

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  • क्या उद्देशिका स्वयं रिट से प्रवर्तनीय है?

    यह भाग III जैसा स्वतंत्र अधिकार स्रोत नहीं, पर न्यायालय उन अधिकारों और आधारभूत ढाँचे की व्याख्या में इसका उपयोग करते हैं।

  • क्या 1950 की मूल उद्देशिका में गरिमा नहीं थी?

    नहीं। व्यक्ति की गरिमा आरंभ से बंधुता खंड में थी; समाजवादी और पंथनिरपेक्ष 1976 में जुड़े।

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