Revision summary
मनरेगा 2005 ग्रामीण अकुशल कार्य को उपहार नहीं, विधिक माँग बनाता है। पंचायतें, सामाजिक अंकेक्षण और मजदूरी फर्श सशक्तिकरण उपकरण हैं। यह सूखा, झटके तथा महिला और अनुसूचित जाति-जनजाति भागीदारी गद्दी देता है। कम व्यक्ति-दिन, विलंबित मजदूरी और कमजोर परिसंपत्ति गरीबी निकास सीमित करते हैं। कब्जा और बजट छतें खराब मौसम में अधिकार जमा सकती हैं। कथन सुरक्षा-जाल अधिकार के रूप में सत्य है, पूर्ण गरीबी-रोधी रणनीति के रूप में अधूरा।
Model answer
Introduction
मनरेगा (2005) ने ग्रामीण मजदूरी कार्य को योजना से वादयोग्य माँग बना दिया। कथन तब सही है जब गरीब काम माँग सकें, समय पर मजदूरी पाएँ, और संकट के नीचे फर्श रखें। टिप्पणी को यह भी दिखाना चाहिए कि सौ दिन का अकुशल श्रम गरीबी का गद्दी है, स्वयं गरीबी से निकास नहीं।
Body
अधिनियम अधिकार कैसे देता है
- यह विधिक हक बनाता है: ग्रामीण परिवार का वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक कार्य माँग सकता है, और राज्य उसे दे या बेरोजगारी भत्ता दे।
- ग्राम पंचायत और ग्राम सभा पंजीकरण, कार्यों की पहचान और सामाजिक अंकेक्षण के केन्द्र में बैठती हैं, जो कलेक्टर की कृपा नहीं, अधिकार की भाषा है।
- वैधानिक मजदूरी के साथ सौ दिनों का फर्श ग्रामीण आरक्षण मजदूरी उठाता है और सूखे महीनों में निजी कृषि मजदूरी खींच सकता है।
- कम से कम एक-तिहाई लाभार्थी महिलाएँ हों; अनुसूचित जाति और जनजाति परिवारों ने अधिनियम का भारी उपयोग किया, इसलिए सशक्तिकरण सामाजिक भी है, केवल कैलोरी नहीं।
- खातों, मस्टर रोल और (बाद में) आधार-जुड़े डीबीटी से उस बिचौलिए को काटना था जो राहत अनाज खाता था।
जमीन पर गरीबी कमी
- सूखा तथा 2008-09 और 2020 के झटकों में उपभोग चिकनाई ने अधिनियम को बाजार चूक पर सुरक्षा जाल दिखाया।
- टिकाऊ परिसंपत्ति—तालाब, सड़क, भूमि विकास—कृषि उत्पादकता उठा सकती है यदि कार्य-शेल्फ वास्तविक और अनुरक्षित हो।
- गाँव में काम मिलने पर संकट प्रवास धीमा हो सकता है, जो उन महिलाओं के लिए गरिमा लाभ है जो पुरुषों जितनी आसानी से प्रवास नहीं कर सकतीं।
दावे की सीमाएँ
- व्यक्ति-दिन अक्सर सौ से बहुत कम रह जाते हैं; विलंबित मजदूरी और अस्वीकृत भुगतान अधिकार को कतार बना देते हैं।
- परिसंपत्ति गुणवत्ता असमान है; बिना रखरखाव की मिट्टी खुदाई परिवार को गरीबी से स्नातक नहीं करती।
- जहाँ पंचायतें कब्जे में हैं, रिसाव, नकली मस्टर रोल और कमजोर सामाजिक अंकेक्षण बने रहते हैं।
- सामग्री-श्रम अनुपात, प्रशासनिक छतें और विलंबित संघ विमोचन माँग ठीक तब जमा सकते हैं जब संकट शिखर पर हो।
- कौशल, भूमि, स्वास्थ्य और गैर-कृषि रोजगार अधिनियम से बाहर हैं; गरीबी निकास को वे सीढ़ियाँ अभी चाहिए।
टिप्पणी
- अधिनियम ग्रामीण गरीबों को अधिकार-धारक बनाकर सशक्त करता है और वित्त व अंकेक्षण होने पर सबसे बुरी दरिद्रता घटाता है।
- वह स्वयं ग्रामीण गरीबी समाप्त नहीं करता; वह विधिक फर्श है जिस पर अन्य आजीविकाएँ बननी चाहिए।
Flow diagram
flowchart TD R[कार्य माँग का विधिक अधिकार] --> P[पंचायत सामाजिक अंकेक्षण] P --> W[मजदूरी और 100 दिन] W --> A[गरीबी गद्दी] L[विलंब रिसाव कमजोर परिसंपत्ति] --> A
Conclusion
मनरेगा मजदूरी कार्य को माँग योग्य अधिकार, स्थानीय अंकेक्षण प्रक्रिया और मजदूरी फर्श बनाकर ग्रामीण गरीबों को सशक्त करता है। गरीबी भूख और संकट के हाशिए पर घटती है, मिटती नहीं, जब तक मजदूरी समय पर न हो और परिसंपत्ति तथा अन्य नीतियाँ उत्पादकता न उठाएँ।
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क्या मनरेगा संघ योजना है या राज्य कर्तव्य?
यह विधिक अधिकार बनाने वाला संघ अधिनियम है। वित्त साझा है; क्रियान्वयन और बेरोजगारी भत्ता अधिकांशतः राज्य और पंचायत पर हैं।
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क्या अधिक व्यक्ति-दिन हमेशा कम गरीबी है?
अधिक दिन संकट घटाते हैं यदि मजदूरी चुकाई जाए। स्थायी निकास अभी परिसंपत्ति, कौशल और अन्य आजीविकाओं पर निर्भर है।
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