Q5 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2019 · GS II · 8 अंक · कक्ष में ~125 शब्द · 1 min read

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सिटिजन चार्टर (नागरिक चार्टर) पर एक टिप्पणी लिखिए।

विषय: Indian Constitution. पाठ्यक्रम: Indian Constitution — historical underpinnings, evolution, features, amendments, significant provisions and basic structure. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2019 और Indian Constitution से।

Revision summary

नागरिक चार्टर सेवा, समय और शिकायत का लिखित सार्वजनिक मानक है। भारत ने यूके मॉडल के बाद 1997 मुख्यमंत्री सम्मेलन से इसे अपनाया। मूल तत्व सेवाएँ, मानक, उपयोगकर्ता कर्तव्य और नामित निवारण अधिकारी हैं। सेवोत्तम और कुछ राज्य लोक सेवा अधिनियम वचन को कठोर करने का प्रयास करते हैं। क़ानून, लेखापरीक्षा और प्रचार के बिना चार्टर पोस्टर रहता है।

Model answer

Introduction

नागरिक चार्टर किसी संगठन का सार्वजनिक लिखित वचन है कि उपयोगकर्ता किन मानकों, समय-सीमाओं और शिकायत पथ की अपेक्षा कर सकता है। यह जवाबदेह सेवा-प्रदाय का उपकरण है, स्वयं नया मौलिक अधिकार नहीं।

Body

विचार और उद्भव

  • चार्टर विचार 1991 में यूनाइटेड किंगडम से आया और भारत में 1997 मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन के बाद विभागवार सार्वजनिक दस्तावेज के रूप में अपनाया गया।
  • यह नागरिक को बताता है कि कार्यालय क्या करेगा, कितना समय लगेगा, उपयोगकर्ता क्या जमा करे, और मानक टूटे तो कहाँ शिकायत करे।

मूल तत्व

  • उपयोगी चार्टर दृष्टि, सेवाओं की सूची, गुणवत्ता और समय मानक, यदि हों तो उपयोगकर्ता शुल्क, शिकायत अधिकारी और समीक्षा तिथि बताता है।
  • सेवोत्तम मॉडल ने बाद में चार्टर को लोक-शिकायत तंत्र और सेवा-गुणवत्ता प्रमाणन से जोड़ा ताकि कागज केवल दीवार पोस्टर न रहे।
  • सूचना का अधिकार और कई राज्यों के लोक सेवा गारंटी अधिनियम कुछ चार्टर-सदृश समय-सीमाओं को कठोर वैधानिक धार देते हैं।

सीमाएँ

  • अधिकांश संघ चार्टर प्रशासनिक रहते हैं; विलंब स्वतः मुआवजा नहीं देता जब तक अलग क़ानून न कहे।
  • अस्पष्ट मानक, कम प्रचार और स्वतंत्र लेखापरीक्षा का अभाव चार्टर को नारा बना देते हैं, इसलिए द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने कानूनी रूप से समर्थित, निगरानी वाले चार्टर माँगे।

Flow diagram

flowchart TD
  O[लोक कार्यालय] --> H[नागरिक चार्टर]
  H --> S[समय और गुणवत्ता मानक]
  S --> G[शिकायत निवारण]
  G --> A[जवाबदेही]

Conclusion

नागरिक चार्टर प्रकाशित सेवा मानक और शिकायत पथ है। भारत में जहाँ विभाग उसे जीवित रखें वहाँ पारदर्शिता सुधरती है; जहाँ वह अप्रवर्तनीय और अपठित है वहाँ कमजोर अधिकार रहता है।

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    Next question in the 2019 paper (Q6). View answer →

  • क्या नागरिक केवल केंद्रीय मंत्रालय चार्टर पर मुकदमा कर सकता है?

    सामान्यतः स्वतंत्र अधिकार के रूप में नहीं। न्यायालय इसे निष्पक्षता मानक मान सकते हैं, पर क्षतिपूर्ति को प्रायः क़ानून या सिद्ध विधिक कर्तव्य चाहिए।

  • क्या नागरिक चार्टर आरटीआई के समान है?

    नहीं। आरटीआई सूचना का सांविधिक अधिकार है। चार्टर वादा करता है कि सेवा कैसे मिलेगी; यह आरटीआई अधिनियम का स्थान नहीं लेता।

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