Q2 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2019 · GS II · 8 अंक · कक्ष में ~125 शब्द · 2 min read

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भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की भूमिका संक्षेप में बताइये।

विषय: Finance Commission. पाठ्यक्रम: Role of the Finance Commission in Centre-State financial relations. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2019 और Finance Commission से।

Revision summary

एनएचआरसी मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अधीन सांविधिक निकाय है। यह लोक सेवक-संबद्ध उल्लंघन की जाँच करता है, जेलें देखता है और सुरक्षाओं की समीक्षा करता है। यह मुआवजा या कार्रवाई की सिफारिश करता है और संवैधानिक न्यायालय जा सकता है। यह दोषसिद्ध नहीं कर सकता; आदेश विचारण न्यायालय की डिक्री नहीं हैं। प्रभाव प्रतिवेदन रखने और नियुक्ति की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।

Model answer

Introduction

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अधीन भारत की सांविधिक शीर्ष अधिकार संस्था है। इसकी भूमिका जाँच, सिफारिश और अधिकार संस्कृति का संवर्धन है, दंड न्यायालय या उच्च न्यायालय का स्थान नहीं।

Body

सांविधिक भूमिका

  • आयोग स्वप्रेरणा या शिकायत पर लोक सेवक द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन या उनकी रोक में उपेक्षा की जाँच करता है, और जेलों तथा अन्य अभिरक्षा संस्थानों का दौरा कर सकता है।
  • यह संवैधानिक और कानूनी सुरक्षाओं की समीक्षा करता है, संधियों का अध्ययन करता है, शोध को निधि देता है और साक्षरता फैलाता है ताकि अधिकार केवल न्यायालय शब्दावली न रहें।
  • यह मुआवजा, अभियोजन या विभागीय कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है, और निदेश हेतु उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय जा सकता है।

भूमिका की सीमा

  • निष्कर्ष सिफारिशात्मक हैं; संघ या राज्य कार्रवाई बताए, पर आयोग स्वयं दोषसिद्ध या बाध्यकारी डिक्री नहीं दे सकता जैसे विधि न्यायालय देता है।
  • सशस्त्र बलों की शिकायतें संकीर्ण पटरी पर हैं, और परिसीमा अवधि तथा सरकारी जाँच पर निर्भरता गति कुंद करती है।
  • 2019 संशोधन ने अध्यक्ष और सदस्यों का पूल बदला; स्वतंत्रता अभी इस पर टिकी है कि नियुक्ति कौन है और प्रतिवेदन रखे व बहस होते हैं या नहीं।

अधिकार वास्तुकला में स्थान

  • एनएचआरसी राज्य मानवाधिकार आयोगों के ऊपर और न्यायालयों, राष्ट्रीय महिला आयोग तथा अन्य क्षेत्रीय निकायों के साथ राष्ट्रीय नोड है।
  • सार्वजनिक जाँच और वार्षिक प्रतिवेदन तब भी राष्ट्रीय अभिलेख बनाते हैं जब मंत्रालय सिफारिश केवल नोट करे।

Flow diagram

flowchart TD
  C[शिकायत या स्वप्रेरणा] --> I[एनएचआरसी जाँच]
  I --> R[सिफारिश]
  R --> G[संघ या राज्य कार्रवाई]
  I --> K[निदेश हेतु न्यायालय]

Conclusion

एनएचआरसी की भूमिका जाँच, सिफारिश, अभिरक्षा दौरा और शिक्षा है। सरकारें प्रतिवेदनों पर कार्रवाई करें तो अधिकार सुदृढ़ होते हैं; यह विचारण न्यायालय या रिट न्यायालय का स्थान नहीं ले सकता, और वह सीमा 1993 अधिनियम में बनी है।

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  • क्या एनएचआरसी पुलिस अधिकारी को दंड दे सकता है?

    यह अभियोजन या विभागीय कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है। दंड अभी दंड न्यायालय या अनुशासन प्राधिकारी के पास है।

  • क्या एनएचआरसी संवैधानिक निकाय है?

    नहीं। यह 1993 अधिनियम से बना सांविधिक आयोग है, समर्पित संवैधानिक अनुच्छेद से नहीं।

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