Revision summary
एसएचजी छोटे बचत समूह हैं, अधिकांशतः ग्रामीण महिलाओं के, नाबार्ड और डे-एनआरएलएम के अधीन बैंक से जुड़े। उन्होंने बिना जमानत ऋण बढ़ाया और अनौपचारिक ऋणदाताओं पर निर्भरता घटाई। बैठकों और बैंक पहुँच ने महिलाओं की गतिशीलता, पंचायत आवाज और सामाजिक-अभियान क्षमता बढ़ाई। आजीविका प्रभाव पशुधन और फुटकर व्यापार में उच्च-मूल्य फर्मों से अधिक मजबूत है। सीमाएँ अभिजात कब्जा, पतली उद्यम कुशलता, तथा भूमि और बाजारों पर पुरुष नियंत्रण हैं।
Model answer
Introduction
स्वयं सहायता समूह छोटे, अधिकांशतः महिला-नेतृत्व वाले बचत حلقे हैं जो बचत करते हैं, आंतरिक ऋण देते हैं, फिर बैंक से जुड़ते हैं। ग्रामीण भारत पर उनका प्रभाव ऋण पहुँच, महिलाओं की सार्वजनिक उपस्थिति और कुछ आजीविकाओं में वास्तविक है, पर असमान है और उच्च-लाभ उद्यम पर उपभोग तथा सामाजिक एकजुटता से अभी पतला है।
Body
ऋण और आजीविका प्रभाव
- 1992 से नाबार्ड एसएचजी-बैंक लिंकेज कार्यक्रम और बाद में डे-एनआरएलएम ने करोड़ों ग्रामीण महिलाओं को व्यक्तिगत जमानत के बिना बैंकयोग्य ग्राहक बनाया, कई गाँवों में साहूकार की पकड़ काटकर।
- आंतरिक ऋण और बार-बार बैंक ऋण शिक्षा, स्वास्थ्य झटके, छोटा पशुधन और फुटकर व्यापार वित्त करते हैं; संघ और उत्पादक समूह कभी दूध, हस्तशिल्प और सार्वजनिक खरीद में जाते हैं।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और बैंकिंग संवाददाता अक्सर उसी एसएचजी नेटवर्क पर सवार होते हैं, इसलिए समूह ऋण क्लब के साथ लास्ट-माइल राज्य भी है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव
- साप्ताहिक बैठकें, बहीखाता और बैंक दौरे ने महिलाओं की गतिशीलता, ग्राम सभा में आवाज, और कुछ राज्यों में पंचायत सीटों तक पाइपलाइन बढ़ाई है।
- समूह स्वच्छता, पोषण और नशा-विरोधी अभियानों के वाहन रहे हैं, जो आय लाभ मामूली होने पर भी घरेलू सौदेबाजी बदलते हैं।
सीमाएँ
- कई एसएचजी बचत-और-ऋण حلقे रहते हैं; कम फर्म बनते हैं जिनके बाजार, ब्रांड और कुशल प्रबंधक हों, इसलिए संरचनात्मक ग्रामीण गरीबी पर प्रभाव आंशिक है।
- जहाँ लक्ष्य सुविधा से आगे निकल जाएँ वहाँ अभिजात कब्जा, भूत समूह और अति-ऋण दिखते हैं, और भूमि तथा बड़ी मूल्य शृंखलाएँ अभी पुरुष नियंत्रण में हैं।
Flow diagram
flowchart TD S[बचत حلقे] --> B[बैंक लिंकेज] B --> C[ऋण और बफर] C --> L[आजीविका और आवाज] L --> V[ग्राम सार्वजनिक जीवन]
Conclusion
एसएचजी ने ग्रामीण महिला का बैंक, पंचायत और घर से संबंध फिर लिखा है, जो गाँव के जीवन में सभ्यतागत खिसकाव है। उन्होंने स्वयं ग्रामीण अर्थव्यवस्था का औद्योगीकरण नहीं किया; प्रभाव वहाँ गहरा है जहाँ ऋण वास्तविक आजीविका क्लस्टर और ईमानदार सुविधा से मिले।
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क्या एसएचजी सूक्ष्मवित्त कंपनियों के समान हैं?
नहीं। एसएचजी सदस्य-स्वामित्व बचत समूह है जो बैंक से उधार ले सकता है। एनबीएफसी-एमएफआई लाभ के लिए ऋण देने वाली कंपनी है, भिन्न लाइसेंस पर।
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क्या एसएचजी ने ग्रामीण गरीबी समाप्त कर दी?
नहीं। उन्होंने ऋण, बफर और महिलाओं की सार्वजनिक भूमिका सुधारी। संरचनात्मक गरीबी को भूमि, कौशल, रोजगार और समूह ऋण से परे बाजार अभी चाहिए।
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