Revision summary
वन कार्बन संचित करते हैं, नदियाँ खिलाते हैं, और 1972 अधिनियम तथा प्रोजेक्ट टाइगर के अधीन छतरी प्रजातियाँ रखते हैं। आर्द्रभूमि और नदियाँ जल पुनर्भरण करती हैं, बाढ़ रोकती हैं, फ्लाईवे पक्षी रखती हैं; रामसर और 2017 नियम वह मूल्य नामित करते हैं। जलग्रहण और आर्द्रभूमि एक जल युग्म हैं; एक को हानि दो तो दूसरा असफल हो। कैम्पा, नमामि गंगे, वन अधिकार देव वन और जैवमंडल रिजर्व संरक्षण ढाँचा हैं। अतिक्रमण, सीवेज, आक्रामक प्रजातियाँ और खंडन असंतुलन हैं जिन्हें उन औजारों को पलटना चाहिए।
Model answer
Introduction
वन और जल निकाय भारत के जीन, जल और जलवायु सेवा के दो बड़े जीवित बैंक हैं। उनकी जैव विविधता—बाघ और हॉर्नबिल से मछली, उभयचर और आर्द्रभूमि पक्षी तक—खाद्य जाल और पोषक चक्र चलाती है। पारिस्थितिक संतुलन नारा नहीं; वह जल, कार्बन और प्रजातियों का स्थिर विनिमय है जिसे खेत और नगर उधार लेते हैं।
Body
वन और संतुलन
- वन सर्वेक्षण का वृक्ष और वन आवरण, अभी भौगोलिक क्षेत्र का लगभग पाँचवाँ भाग, कार्बन संचित करता है, मानसूनी पवन तोड़ता है, और हिमालय, पश्चिमी घाट तथा मध्य भारतीय उच्चभूमि से नदियाँ खिलाता है।
- प्रोजेक्ट टाइगर (1973), प्रोजेक्ट एलीफेंट, जैवमंडल रिजर्व और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, बड़े स्तनधारियों को पूरे समुच्चय की छतरी मानते हैं।
- देव वन, वन अधिकार अधिनियम (2006) सामुदायिक अधिकार और संयुक्त वन प्रबंधन दिखाते हैं कि संतुलन गाँव रक्षा में भी जीता है, केवल अधिसूचित उद्यानों में नहीं।
- वन जैव विविधता की हानि—एकफसली रोपण, छत्र पतला होना और सड़कों से खंडन—परागणकर्ताओं, कीट नियंत्रण और मृदा कवक गिराते हैं जिनकी वन किनारे के खेतों को जरूरत है।
जल निकाय और संतुलन
- नदियाँ, बाढ़ मैदान आर्द्रभूमि, तालाब, मैंग्रोव और उच्च-ऊँचाई झीलें भूजल पुनर्भरण करती हैं, बाढ़ रोकती हैं, और मध्य एशियाई फ्लाईवे पर प्रवासी पक्षी रखती हैं।
- रामसर स्थल (चिल्का, केवलादेव, हाल में अधिक यूपी और बिहार आर्द्रभूमि) तथा आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017, कानूनी मान्यता हैं कि झील बंजर नहीं।
- नमामि गंगे, झील पुनरुद्धार और सुंदरबन में मैंग्रोव कार्य जल गुणवत्ता को प्रजाति उत्तरजीविता से बाँधते हैं; मरी नदी पारिस्थितिक असंतुलन है जिसे कोई जीडीपी रेखा नहीं सुधारती।
- आक्रामक जलकुंभी, अशोधित सीवेज, रेत खनन और अतिक्रमण खाद्य जाल सरल करते हैं जब तक मछली मृत्यु और ऑक्सीजनहीन कीचड़ से मीथेन नया ‘संतुलन’ न बन जाए।
संरक्षण साथ क्यों आवश्यक है
- वन जलग्रहण और आर्द्रभूमि एक जलविज्ञानी मशीन हैं; कगार नंगा करो तो तालाब मरे, आर्द्रभूमि सुखाओ तो नीचे का वन सूखे।
- जलवायु परिवर्तन उस मशीन का मूल्य बढ़ाता है: गर्मी, अनियमित मानसून और हिमनद पीछे हटना बची जैव विविधता को एकमात्र सस्ता बीमा बनाते हैं।
- कैम्पा निधि, वन संरक्षण अधिनियम 1980 (संशोधित वन संरक्षण ढाँचे के अधीन) और प्रजाति पुनर्प्राप्ति असफल होते हैं यदि विचलन और प्रदूषण पुनर्स्थापन से आगे दौड़ें।
- इसलिए भारत में पारिस्थितिक संतुलन को वन खंडों और जल निकायों की युग्म के रूप में स्थल संरक्षण चाहिए, लोगों को केवल अतिक्रमणकारी नहीं, अधिकारधारी मानकर।
Flow diagram
flowchart TD F[वन जैव विविधता] --> W[जल कार्बन खाद्य जाल] L[आर्द्रभूमि नदी मैंग्रोव] --> W W --> B[पारिस्थितिक संतुलन] X[विचलन सीवेज आक्रामक] --> I[असंतुलन]
Conclusion
वनों और जल निकायों की जैव विविधता का संरक्षण इसलिए आवश्यक है कि वे पारिस्थितिक तंत्र जल और कार्बन संचित करते हैं, खाद्य जाल रखते हैं, तथा जलवायु और बाढ़ रोकते हैं। भारत के उद्यान, रामसर, गंगा और सामुदायिक-वन औजार तभी चलते हैं जब खंडन, सीवेज और अतिक्रमण को वृद्धि नहीं, असंतुलन माना जाए।
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क्या रोपण वन जैव विविधता का स्थान ले सकते हैं?
काष्ठ खंड कुछ कार्बन संचित करते हैं। वे मिश्रित देशी वन का खाद्य जाल नहीं बदलते, इसलिए केवल वृक्षों से पारिस्थितिक संतुलन नहीं लौटता।
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एक उत्तर में वन और जल निकाय क्यों युग्म हैं?
क्योंकि जलग्रहण और आर्द्रभूमि एक जल मशीन हैं। प्रश्न स्वयं दोनों को पारिस्थितिक संतुलन के लिए आवश्यक मानता है।
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