Revision summary
गंगा-यमुना-शारदा परिवार की नहरें दोआब और पूर्व के भाग सींचती हैं। पश्चिमी और मध्य जलोढ़ में नलकूप मुख्य स्रोत हैं। बुंदेलखंड और कठोर-शैल दक्षिण में कुएँ और तालाब हावी हैं। सिंचाई ने पश्चिम में एचवाईवी गेहूँ, गन्ना और उच्च फसल तीव्रता संभव की। अंतराल, बाढ़, जलजमाव और गिरता जल स्तर पूर्व और दक्षिण में वही भूमिका सीमित करते हैं।
Model answer
Introduction
उत्तर प्रदेश किसी भी अन्य भारतीय राज्य से अधिक फसल भूमि सींचता है, दोआब में नहरों, पश्चिम और मध्य में नलकूपों, बुंदेलखंड में कुओं और तालाबों, तथा अवशिष्ट क्षेत्रों पर लिफ्ट योजनाओं के मिश्रण से। वही मिश्रण है कि हरित क्रांति पश्चिम में टिकी और पूर्व अभी जल विश्वसनीयता पर बहस करता है।
Body
सिंचाई के साधन
- नहरें: ऊपरी और निचली गंगा नहरें, पूर्वी यमुना, आगरा नहर, शारदा तंत्र, रामगंगा, सरयू नहर, गंडक, और शाखाएँ जो गंगा-यमुना दोआब तथा पूर्व के भाग सींचती हैं।
- राज्य और निजी नलकूप अब पश्चिमी और मध्य यूपी में सबसे बड़ा स्रोत हैं, मोटे जलोढ़ जलभृत का प्रयोग कर।
- पक्के कुएँ और बोरिंग वहाँ महत्त्व रखते हैं जहाँ जल स्तर पहुँच में हो और बिजली अनियमित हो।
- तालाब, आहार और चेक-डैम बुंदेलखंड और विंध्य दक्षिण में मायने रखते हैं, जहाँ कठोर शैल सस्ते नलकूप सीमित करता है।
- लिफ्ट सिंचाई, नदी पर पंप, और पोखर जीर्णोद्धार (मनरेगा और खेत-तालाब योजनाओं सहित) उन अंतरालों को भरते हैं जिन्हें गुरुत्व नहरें चूकती हैं।
- स्थानिक पैटर्न पश्चिम में नहर के साथ नलकूप, पूर्व में अधिक वर्षा-और-नहर अनिश्चितता, और दक्षिण में तालाब-कुआँ निर्भरता है।
कृषि विकास में भूमिका
- सुनिश्चित जल ने पश्चिमी यूपी के गेहूँ-धान और गेहूँ-गन्ना पैकेज संभव किए: उच्च उपज बीज, उर्वरक और दोहरी फसल को नारों से अधिक सिंचाई चाहिए।
- फसल तीव्रता, ग्रीष्म सब्जियाँ और पश्चिम में डेयरी चारा नलकूप विश्वसनीयता पर टिके हैं।
- नहर कमांड ने भूमि मूल्य और कुलक-किसान वर्ग उठाए, जो सामाजिक धार वाली कृषि विकास है।
- सिंचाई ने खराब निकासी वाले दोआब टुकड़ों में जलजमाव और लवणता भी पैदा की, और जहाँ नलकूप पुनर्भरण से आगे चलें वहाँ भूजल गिरावट, इसलिए विकास निःशुल्क नहीं है।
- पूर्वी यूपी की निम्न नलकूप घनत्व और बाढ़-प्रवण नहरें अर्थ हैं कि सिंचाई की विकास भूमिका अभी अधूरी है: धान अक्सर वर्षा-समय है, और रबी अधिक जोखिम भरा।
- बुंदेलखंड की तालाब-और-कुआँ सिंचाई, यदि बहाल हो, दूसरी हरित क्रांति से अधिक सूखा बीमा है; उसके बिना असफल वर्षा के बाद संकट प्रवास आता है।
- सार्वजनिक नहर रखरखाव, पंपों के लिये बिजली, और संयुक्त उपयोग (नहर तथा भूजल) तय करते हैं कि सिंचाई विकास उपकरण रहे या क्षय जाल।
Flow diagram
flowchart TD C[दोआब नहरें] --> D[कृषि विकास] T[पश्चिम मध्य नलकूप] --> D K[बुंदेलखंड तालाब कुएँ] --> D D --> R[तीव्रता गन्ना गेहूँ] D --> W[जलजमाव क्षय अंतराल]
Conclusion
यूपी के सिंचाई साधन नहरें, नलकूप, कुएँ, तालाब और लिफ्ट हैं। उन्होंने पश्चिमी कृषि विकास और फसल तीव्रता का आधार दिया; पूर्व और बुंदेलखंड दिखाते हैं कि वही उपकरण, यदि पतले या क्षयशील हों, विकास अधूरा छोड़ते हैं।
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क्या यूपी में नहर सिंचाई अभी मुख्य स्रोत है?
कई पश्चिमी और मध्य जिलों में क्षेत्र में नलकूप अब नहरों से आगे हैं। नहरें पुनर्भरण और सस्ते भूजल से दूर कमांड के लिये महत्त्वपूर्ण रहती हैं।
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क्या अधिक सिंचाई हमेशा विकास है?
जहाँ निकासी और पुनर्भरण साथ दें वह तीव्रता और उपज बढ़ाती है। जलजमाव, लवणता और गिरती सारणियाँ विकास लागत हैं जब वे साथ न दें।
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