Q11 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2021 · GS I · 12 अंक · कक्ष में ~200 शब्द · 2 min read

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गुप्तकाल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास पर प्रकाश डालिये।

विषय: Indian culture. पाठ्यक्रम: History of Indian Culture — Art Forms, literature and Architecture from ancient to modern times. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2021 और Indian culture से।

Revision summary

आर्यभट का आर्यभटीय और वराहमिहिर के ग्रंथ गुप्त खगोल और गणित चिह्नित करते हैं। उज्जैन उस ज्ञान का शिक्षण और मध्याह्न केंद्र था। मेहरौली लौह स्तंभ और स्वर्ण दीनार धातुकर्म दिखाते हैं। आयुर्वेद संकलन से चला; ईंट मंदिर और सारनाथ प्रतिमाएँ अनुप्रयुक्त ज्यामिति दिखाती हैं। शिखर दरबारी शास्त्र था, हर गाँव की कारखाना क्रांति नहीं।

Model answer

Introduction

चंद्रगुप्त प्रथम से स्कंदगुप्त तक गुप्त शताब्दियाँ वैज्ञानिक ग्रंथों, कम जंग वाले लोहे, और अपेक्षाकृत स्थिर उत्तर भारतीय केंद्र में ईंट-पत्थर निर्माण के लिए स्मृत हैं। प्रकाश नामित कार्य पर डालना है, आधुनिक प्रयोगशाला राज्य पर नहीं।

Body

खगोल और गणित

  • आर्यभट का आर्यभटीय (499 ई.) दशमलव स्थान-मान अंकगणित प्रयोग करता है, पाई का निकट मान देता है, और पृथ्वी को घूर्णनशील मानता है, जो गुप्त गणितीय खगोल का उच्च चिह्न है।
  • वराहमिहिर का पंचसिद्धांतिका पाँच खगोलीय संप्रदायों की तुलना करता है, और बृहत्संहिता वास्तुकला, मौसम और शकुन विद्या को एक विश्वकोशीय ढाँचे में जमा करती है।
  • उज्जैन मध्याह्न और शिक्षण केंद्र रहा, इसलिए गुप्त विज्ञान पुरानी भारतीय और हेलेनिस्टिक बातचीत पर बैठा, शून्य से नहीं निकला।
  • इन ग्रंथों की बीजगणितीय और त्रिकोणमितीय विधियाँ पंचांग, कर्मकांड समय और बाद के इस्लामी तथा यूरोपीय संचरण की सेवा करती हैं; वे अभी सार्वजनिक विद्यालय पाठ्यक्रम नहीं थीं।

धातुकर्म, चिकित्सा और निर्माण

  • मेहरौली लौह स्तंभ, एक गुप्त चंद्र से जुड़ा, सीमित जंग के साथ खड़ा है, जिसे पाठ्यपुस्तकें उच्च कार्बन फोर्जिंग के प्रमाण के रूप में प्रयोग करती हैं।
  • सुल्तानगंज ताम्र बुद्ध और स्वर्ण दीनार बड़े पैमाने की ढलाई तथा नियंत्रित मिश्रधातु दिखाते हैं।
  • चिकित्सा चरक-सुश्रुत पंक्ति जारी रखती है; वाग्भट की अष्टांग परंपरा संकलन के उसी जलवायु में बैठती है, अचानक नए संप्रदाय के रूप में नहीं।
  • भीतरगाँव जैसे ईंट मंदिर, देवगढ़ का पत्थर कार्य, और सारनाथ बुद्ध प्रकार सर्वेक्षण, ज्यामिति और वर्ण रसायन को निर्माण तथा प्रतिमा पर लागू दिखाते हैं।
  • अजंता की बाद की गुफाएँ, सहयोगी वाकाटक संरक्षण में, खनिज रंग और प्लास्टर तकनीक रखती हैं जो उसी पाँचवीं शताब्दी की कार्यशाला दुनिया की हैं।

आलोचनात्मक सीमा

  • गुप्त विज्ञान संस्कृत शास्त्र और दरबारी कार्यशाला का शिखर है, भाप और कारखाना क्रांति नहीं।
  • वर्ण बाधाएँ, पाण्डुलिपि नकल, और क्षेत्रीय विषमता का अर्थ है कि किसान का औजार खगोलज्ञ की सारणी से कम बदला।
  • स्कंदगुप्त के अधीन हूण दबाव दिखाता है कि वैज्ञानिक पुष्पन राजनीतिक शिखर का था, हर गुप्त दशक का नहीं।

Flow diagram

flowchart TD
  G[गुप्त दरबार अधिशेष] --> A[आर्यभट वराहमिहिर]
  G --> M[मेहरौली लोहा स्वर्ण मुद्रा]
  G --> T[भीतरगाँव देवगढ़ सारनाथ]
  A --> P[विज्ञान प्रौद्योगिकी शिखर]
  M --> P
  T --> P

Conclusion

गुप्त विज्ञान और प्रौद्योगिकी आर्यभट और वराहमिहिर में, मेहरौली स्तंभ और स्वर्ण मुद्रा में, तथा ईंट मंदिर और प्रतिमा कार्यशालाओं में दिखती हैं। कालखंड विद्वत् और धातुकर्म कौशल का उच्च बिंदु है, जन औद्योगिक युग नहीं।

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    Next question in the 2021 paper (Q12). View answer →

  • क्या ब्रह्मगुप्त गुप्त वैज्ञानिक हैं?

    ब्रह्मगुप्त ने सातवीं शताब्दी के आरंभ में लिखा, गुप्त साम्राज्य शिखर के बाद। वे उसी गणितीय पंक्ति को जारी रखते हैं किंतु दरबारी गुप्त लेखक नहीं हैं।

  • क्या गुप्त प्रौद्योगिकी में बारूद या मुद्रण है?

    नहीं। अभिलेख खगोल, धातुकर्म, चिकित्सा, मुद्रा और निर्माण का है। बाद के आविष्कार पाँचवीं शताब्दी में नहीं पढ़े जाने चाहिए।

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