Revision summary
विपरीत प्रवास शहरों से पैतृक गाँवों को श्रम की वापसी है। 2020 में उ.प्र. ने दिल्ली, मुंबई, गुजरात और अन्य गंतव्यों से जन आवक पाई। विप्रेषण ढहे; खेत और मनरेगा शहरी मजदूरी नहीं बदल सके। घरों की भीड़, कलंक और क्वारंटीन ने सामाजिक व्यवस्था तनी। कई कामगार बाद में पुनः गए, जो दिखाता है गाँव शरण था, नई अर्थव्यवस्था नहीं।
Model answer
Introduction
विपरीत प्रवास गंतव्य शहरों और अन्य राज्यों से कामगारों का अपने गाँव लौटना है, सामान्य ग्रामीण-से-शहरी प्रवाह के विरुद्ध। 2020 के कोविड-19 लॉकडाउन में यह दिल्ली, मुंबई, गुजरात, पंजाब और दक्षिण से उत्तर प्रदेश में जन आंदोलन बना।
Body
विपरीत प्रवास क्या है
- उ.प्र. में साधारण प्रवास मजदूरी और विप्रेषण के लिए महानगरों और औद्योगिक पेटियों की ओर श्रम का बहिर्प्रवास है।
- विपरीत प्रवास उस श्रम की अचानक वापसी है जब नौकरियाँ, परिवहन और शहरी आश्रय ढहें, जैसा 24 मार्च 2020 के राष्ट्रीय लॉकडाउन के बाद हुआ।
- विशेष रेलगाड़ियाँ, बसें और राजमार्गों पर पैदल कतारों ने वापसी दृश्य बनाई; पूर्वी और बुंदेलखंड जिले, जो सबसे अधिक श्रम निर्यात करते हैं, सबसे बड़ी आवक पाए।
उत्तर प्रदेश पर आर्थिक प्रभाव
- ग्रामीण उपभोग थामे विप्रेषण रुक गए; अतिरिक्त मुँह आने पर भी प्रसंस्कृत वस्तुओं और मकान निर्माण की गाँव माँग थमी।
- शहरी उ.प्र. और गंतव्य अर्थव्यवस्थाओं ने निर्माण, कारखाना और सेवा श्रम खोया; राज्य के स्थानीय एमएसएमई भी बंद हुए, इसलिए लौटे लोग घर पर तैयार नौकरियों में नहीं घुसे।
- कृषि ने कटाई और अगली बुआई के कुछ हाथ लिए, किंतु जोतें शहरी मजदूरी पर सबको रोजगार देने के लिए बहुत छोटी थीं।
- राज्य ने मनरेगा कार्य, खाद्यान्न वितरण और बाद में रोजगार तथा कौशल अभियान बढ़ाए; जिला प्रशासन पर राजकोषीय और प्रशासनिक भार तेज चढ़ा।
- जहाँ बचत पतली थी वहाँ अनौपचारिक ऋण और संकट संपत्ति बिक्री दिखी; रेल फिर चलने पर कुछ लौटे बाद में पुनः प्रवास किए, जो दिखाता है आर्थिक झटका ठहराव था, नई स्थिर ग्रामीण अर्थव्यवस्था नहीं।
सामाजिक व्यवस्था
- भीड़ भरे पैतृक घर, संक्रमण का भय, और ‘शहर से लौटे’ पर कलंक नातेदारी और जाति पड़ोस तने।
- पंचायतों और पुलिस ने क्वारंटीन चलाया, कभी कठोरता से; राहत या बाहरी लोगों पर अफवाहें और छिटपुट टकराव ने संस्था के रूप में गाँव के पतन नहीं, तनाव में व्यवस्था दिखाई।
- महिलाओं का अवैतनिक देखभाल काम बढ़ा; बच्चों की शिक्षा टूटी; दलित और मुस्लिम गरीब मजदूर सड़क पर सबसे अधिक उजागर और लौटने पर सबसे कम सुरक्षित थे।
- प्रकरण ने उ.प्र. की निर्यातित श्रम पर निर्भरता राजनीतिक रूप से दृश्य बनाई, जो आर्थिक जितना सामाजिक तथ्य है।
Flow diagram
flowchart TD L[लॉकडाउन नौकरी हानि] --> R[यूपी को विपरीत प्रवास] R --> E[विप्रेषण झटका मनरेगा] R --> S[नाते तनाव क्वारंटीन]
Conclusion
2020 लॉकडाउन में विपरीत प्रवास उ.प्र. के बहिर्प्रवासियों की बाध्य घर वापसी थी। उसने विप्रेषण काटे, गाँव और मनरेगा पर बोझ डाला, और नातेदारी तथा क्वारंटीन व्यवस्था तनी, बिना राज्य को आत्मनिर्भर ग्रामीण श्रम बाजार बनाए।
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क्या विपरीत प्रवास सेवानिवृत्ति के बाद लौटने के समान है?
नहीं। यह कामकाजी आयु के श्रम की अचानक, संकट-चालित वापसी है, नियोजित वृद्धावस्था घर वापसी नहीं।
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क्या उ.प्र. की अर्थव्यवस्था ने स्थायी सस्ता श्रम पाया?
गाँवों में अस्थायी श्रम अधिशेष मिला। अधिकांश गंतव्य मजदूरी नहीं बदली; परिवहन खुलने पर कई लोग फिर गए।
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