Revision summary
इटली ने 30–31 अक्तूबर 2021 को रोम में जी20 शिखर की मेजबानी की। अध्यक्षता विषय पीपल, प्लैनेट, प्रॉस्पेरिटी था। लोग में टीके और कोविड-19 से न्यायपूर्ण पुनर्प्राप्ति थी। ग्रह 1.5°C लक्ष्य और सीओपी26 ग्लासगो की ओर इशारा करता था। समृद्धि में जी20/ओईसीडी वैश्विक न्यूनतम निगम कर सौदा था।
Model answer
Introduction
इटली ने 30–31 अक्तूबर 2021 को रोम में जी20 नेता शिखर की मेजबानी की। टिप्पणी अध्यक्षता विषय पीपल, प्लैनेट, प्रॉस्पेरिटी तथा रोम के पुनर्प्राप्ति, जलवायु और कर पैकेज पर रहे, बिना गढ़े उद्धरण के।
Body
प्रमुख विषय
- इटली की जी20 अध्यक्षता ने काम को पीपल, प्लैनेट, प्रॉस्पेरिटी के इर्द गढ़ा—कोविड-बाद ढाँचा जो स्वास्थ्य और रोजगार को जलवायु तथा अधिक न्यायपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था से बाँधता था।
- साथ पुनर्प्राप्ति और अधिक मजबूत पुनर्प्राप्ति का राजनीतिक नारा उसी त्रयी में था: यदि लोग और ग्रह छूटें तो स्थायी समृद्धि नहीं।
रोम ने क्या जोर दिया
- लोग: टीका पहुँच, महामारी तैयारी, और सबसे उजागर श्रमिकों तथा देशों का समर्थन।
- ग्रह: सीओपी26 ग्लासगो से पहले 1.5°C प्रयास जीवित रखना, उत्सर्जन, कोयला वित्त और सतत पुनर्प्राप्ति पर वचन के साथ।
- समृद्धि: ओईसीडी/जी20 समावेशी ढाँचे के वैश्विक न्यूनतम निगम कर सौदे का समर्थन ताकि बड़ी फर्में संचालन स्थान पर कर दें।
टिप्पणी
- विषय नई संस्था नहीं था; दशकों की सबसे बुरी शांतिकाल मंदी के बाद बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का समन्वय संदेश था।
- डिलीवरी अभी राष्ट्रीय बजट और सीओपी26 पर थी; विज्ञप्ति स्वयं टीका नहीं लगाती न कार्बन काटती।
Flow diagram
flowchart TD R[जी20 रोम 2021] --> T[पीपल प्लैनेट प्रॉस्पेरिटी] T --> PE[स्वास्थ्य और रोजगार] T --> PL[जलवायु सीओपी26 की ओर] T --> PR[वैश्विक न्यूनतम कर] PE --> O[साझा पुनर्प्राप्ति] PL --> O PR --> O
Conclusion
जी20 रोम 2021 का प्रमुख विषय पीपल, प्लैनेट, प्रॉस्पेरिटी था: संयुक्त पुनर्प्राप्ति जिसने स्वास्थ्य, जलवायु और न्यायपूर्ण कराधान को एक एजेंडा माना। शिखर ने राजनीतिक दिशा दी; क्रियान्वयन राज्यों और बाद की जलवायु वार्ता पर रहा।
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क्या 2021 में भारत जी20 मेजबान था?
नहीं। 2021 में इटली मेजबान था। भारत की जी20 अध्यक्षता बाद में 2023 में आई।
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क्या रोम ने जलवायु पर नई संधि बनाई?
नहीं। उसने राजनीतिक वचन दिए जो सीओपी26 और राष्ट्रीय नीति में गए; यह कानूनी बाध्य जलवायु संधि नहीं थी।
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