Q15 · UPPSC PCS मुख्य परीक्षा 2021 · GS I · 12 अंक · कक्ष में ~200 शब्द · 2 min read

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वैश्वीकरण को परिभाषित कीजिए। भारत में ग्रामीण सामाजिक संरचना पर इसके प्रभाव का मूल्यांकन कीजिए।

विषय: Liberalisation, privatisation and globalisation. पाठ्यक्रम: Meaning of liberalisation, privatisation and globalisation, and their effects on the economy, polity and social structure. वही आधिकारिक प्रश्न वर्ष 2021 और Liberalisation, privatisation and globalisation से।

Revision summary

वैश्वीकरण वस्तुओं, पूँजी, लोगों और छवियों के गाढ़े सीमापार प्रवाह हैं। 1991 के बाद वह भारतीय गाँवों में बाजार, प्रेषण और मीडिया से घुसा। वंशानुगत जजमानी कमजोर होती है; विवाह में जाति रहती है। ठेकेदार-श्रम विभाजन और प्रवास घराने पंक्ति पलटते हैं। मूल्यांकन: गतिशीलता और आकांक्षा तथा जोखिम, विषमता और ध्रुवीकृत पहचान।

Model answer

Introduction

वैश्वीकरण वस्तुओं, पूँजी, लोगों, छवियों और नियमों के सीमापार प्रवाह का गाढ़ा होना है, जिससे गाँव का बाजार और गाँव का विवाह आंशिक रूप से विश्व कीमतों और विश्व मीडिया पर बैठते हैं। 1991 के बाद भारत में यह प्रक्रिया ग्रामीण सामाजिक संरचना तक नकदी, प्रवास और स्क्रीन से पहुँची, केवल बंदरगाहों से नहीं।

Body

परिभाषा

  • आर्थिक भाषा में वैश्वीकरण व्यापार और निवेश का उदारीकरण तथा वैश्विक उत्पादन श्रृंखलाएँ हैं।
  • इस प्रश्न की समाजशास्त्रीय भाषा में यह सांस्कृतिक भी है: उपग्रह टेलीविजन, मोबाइल, पैक खपत, और यह भाव कि अन्यत्र का जीवन मानक है।
  • भारत के 1991 सुधार, डब्ल्यूटीओ प्रवेश, और बाद के डिजिटल मंच नीति द्वार हैं; प्रेषण और चक्रीय प्रवास ग्रामीण द्वार हैं।

ग्रामीण सामाजिक संरचना पर प्रभाव

  • जजमानी-प्रकार की वंशानुगत सेवाएँ वहाँ कमजोर होती हैं जहाँ नकद मजदूरी, दुकानें और मशीनें पुरानी अनाज-सेवा सौदेबाजी की जगह लेती हैं।
  • जाति अभी विवाह और कई मतों को संगठित करती है, किंतु जहाँ शिक्षा, सेना, और खाड़ी या शहर का काम खुला हो पेशा उतना कसकर विरासत नहीं रहता; यह जाति की मृत्यु के बिना गतिशीलता है।
  • ठेकेदारों, दुकानदारों और निजी विद्यालय प्रयोगकर्ताओं की नई ग्रामीण मध्य परत भूमिहीन श्रम के साथ बैठती है, जो दूध, गन्ना और सब्जी में दूर बाजारों से बँधे मूल्य झटकों का सामना करता है।
  • कारखानों, पैकिंग और स्वयं सहायता समूहों में महिलाओं का कार्य बढ़ सकता है, फिर भी जब गाँव बाहरी दुनिया के ‘अनावृत’ महसूस करे तो फोन, आवागमन और इज्जत पर पितृसत्तात्मक नियंत्रण कस सकता है।
  • युवा पुरुषों के प्रवास से नातेदारी और संयुक्त परिवार अधिकार पतले पड़ते हैं; प्रेषण घराने स्तर पाते हैं, जो भूमि सुधार बिना स्थानीय पंक्ति पलटता है।
  • हिंदुत्व, जाति संगठन और सांप्रदायिक मीडिया भी वैश्वीकृत होते हैं: वही नल जो फैशन लाते हैं संगठित पहचान भी लाते हैं, इसलिए ग्रामीण संरचना वैश्विक ब्रांड खपत करते हुए ध्रुवीकृत हो सकती है।

मूल्यांकन

  • प्रभाव सरल आधुनिकीकरण कथा नहीं है। बाजार और मीडिया कुछ वंशानुगत बंदिशें तोड़ते हैं और उपभोक्ता आकांक्षा खोलते हैं।
  • वे छोटे किसानों पर जोखिम भी डालते हैं, भूमिहीन-ठेकेदार विभाजन गहराते हैं, और फसल या कारखाना शहर असफल होने पर दलित तथा आदिवासी टोलों को कमजोर बचाव के साथ छोड़ते हैं।
  • उत्तर प्रदेश का पश्चिम (चीनी, सब्जी, एनसीआर प्रवास) और पूर्व (श्रम बहिर्प्रवास) उसी वैश्वीकरण के दो ग्रामीण चेहरे दिखाते हैं।

Flow diagram

flowchart TD
  G[वैश्वीकरण 1991] --> C[नकद मीडिया प्रवास]
  C --> J[जजमानी कमजोर]
  C --> I[नई विषमता पहचान]
  J --> R[ग्रामीण संरचना परिवर्तन]
  I --> R

Conclusion

वैश्वीकरण सीमाओं के आर-पार बाजारों और अर्थों का एकीकरण है। भारतीय ग्रामीण सामाजिक संरचना पर यह जजमानी और कुछ व्यावसायिक जाति ताले ढीले करता है, और साथ ही विषमता, प्रवास निर्भरता तथा पहचान राजनीति कसता है।

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Students also ask

  • Highlight the salient features of India’s Population Policy (2000). Suggest some measures for population stabilization.

    Next question in the 2021 paper (Q16). View answer →

  • क्या वैश्वीकरण गाँव में जाति समाप्त करता है?

    नहीं। वह कुछ व्यावसायिक ताले ढीले करता है। सजातीय विवाह, इज्जत और कई स्थानीय पदानुक्रम जारी रहते हैं, कभी नए संगठनात्मक रूपों में।

  • क्या वैश्वीकरण केवल आर्थिक प्रक्रिया है?

    इस प्रश्न के लिये नहीं। मीडिया, खपत और पहचान पूँजी के साथ चलते हैं; ग्रामीण संरचना तीनों महसूस करती है।

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